19 अक्टूबर को संधि पूजा…जानें महाअष्टमी पर 48 मिनट का संधिकाल क्यों है खास…

Sandhi Puja on October 19

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के बीच का समय बेहद खास माना जाता है। यही वह समय है, जिसे सनातन परंपरा में संधिक्षण कहा गया है। मान्यता है कि इस दौरान मां दुर्गा की विशेष आराधना करने से साधना का विशेष फल मिलता है। इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ संपन्न होगी। महाअष्टमी के बाद आने वाला संधिकाल 19 अक्टूबर को पड़ेगा और इसी दौरान संधि पूजा की जाएगी।

क्या होता है संधिकाल

संधि का अर्थ है दो अवस्थाओं का मिलन। नवरात्रि में यह अष्टमी और नवमी तिथि के मिलन का समय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार संधि पूजा अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट में की जाती है। यानी पूरा संधिकाल 48 मिनट का माना जाता है। इसी वजह से इस समय को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। भक्त इस दौरान मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और शक्ति स्वरूपा देवी का स्मरण करते हैं।

19 अक्टूबर को संधि पूजा

दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 19 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके आधार पर संधि पूजा का समय 19 अक्टूबर सुबह 10 बजकर 27 मिनट से 11 बजकर 15 मिनट तक बताया गया है। यानी अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर बनने वाला यही 48 मिनट का समय संधि पूजा का विशेष काल होगा।

108 दीपक जलाने की परंपरा

संधि पूजा के दौरान 108 दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है। भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ परंपराओं में फल और सब्जियों की प्रतीकात्मक बलि देने की भी मान्यता है। यहां यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में संधि पूजा की विधि अलग हो सकती है। इसलिए स्थानीय परंपरा और परिवार की पूजा पद्धति का पालन करना उचित माना जाता है।

महिषासुर वध से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार संधिकाल वह समय है जब मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इसलिए इस समय को बुराई पर अच्छाई और शक्ति की विजय के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। यही कारण है कि महाअष्टमी और नवमी के बीच का यह छोटा सा समय नवरात्रि साधना में विशेष महत्व रखता है।

संधि पूजा का संदेश

संधि पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवर्तन का प्रतीक भी मानी जाती है। अष्टमी से नवमी में प्रवेश का यह क्षण हमें यह संदेश देता है कि जीवन में बदलाव का समय कितना महत्वपूर्ण होता है। कुल मिलाकर नवरात्रि का संधिकाल केवल 48 मिनट का समय जरूर है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा की आराधना, दीप प्रज्ज्वलन और ध्यान के जरिए भक्त शक्ति, सकारात्मकता और आत्मविश्वास की कामना करते हैं। 19 अक्टूबर 2026 की सुबह आने वाला यह संधिकाल महाअष्टमी और महानवमी के बीच आस्था का विशेष अवसर होगा।

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