जेवर की उड़ान… मेडिकल हब से ताइवान सिटी तक, यूपी के नए ग्लोबल ग्रोथ इंजन की तैयारी  

Uttar Pradesh emerges
जेवर की उड़ान… मेडिकल हब से ताइवान सिटी तक, यूपी के नए ग्लोबल ग्रोथ इंजन की तैयारी

उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार अब नए आर्थिक केंद्रों की ओर बढ़ रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के आसपास का यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश के बड़े औद्योगिक और निवेश हब के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यीडा की 92वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों ने इस क्षेत्र के भविष्य की तस्वीर को और स्पष्ट कर दिया है।

मेडिकल हब, यूनिवर्सिटी टाउनशिप, फार्मा क्लस्टर, ताइवान सिटी, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और अत्याधुनिक परिवहन सुविधाओं जैसे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलना सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने की रणनीति का हिस्सा है।

जेवर एयरपोर्ट के आसपास बनेगा नया आर्थिक मॉडल

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को केवल हवाई यातायात के केंद्र के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके आसपास एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की योजना है जहां उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और रोजगार एक साथ विकसित हों।

यही वजह है कि यीडा क्षेत्र में ऐसे प्रोजेक्ट चुने जा रहे हैं जो लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकें।

500 एकड़ में बनने वाला मेडिकल हब इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है। सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में प्रस्तावित इस परियोजना से अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। इसमें अस्पताल, मेडिकल संस्थान, रिसर्च सेंटर और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अन्य निवेश की संभावनाएं बनेंगी।

मेडिकल हब और यूनिवर्सिटी टाउनशिप से बढ़ेगा ज्ञान आधारित विकास

आज दुनिया में वे शहर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं जहां उद्योग के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य का मजबूत नेटवर्क मौजूद है। इसी सोच के तहत यीडा क्षेत्र में 480 एकड़ में यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई है।

इससे देश-विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को यहां कैंपस स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

इसका सीधा लाभ युवाओं को मिल सकता है। उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ने के साथ रिसर्च, स्टार्टअप और नई तकनीक आधारित रोजगार के रास्ते खुलेंगे।

ताइवान सिटी: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र

उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने की दिशा में ‘ताइवान सिटी’ एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सेक्टर-6 में करीब 300 एकड़ भूमि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और विदेशी निवेश के लिए आरक्षित की गई है। इसका उद्देश्य ताइवान आधारित कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े निवेशकों को एक समर्पित इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है।

अगर यह योजना जमीन पर तेजी से आगे बढ़ती है तो मोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और हाईटेक उपकरणों के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका और मजबूत हो सकती है।

यह पहल चीन आधारित सप्लाई चेन के विकल्प तलाश रही वैश्विक कंपनियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

फार्मा क्लस्टर से दवा निर्माण को मिलेगी नई ताकत

स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए फार्मा उद्योग की भूमिका लगातार बढ़ रही है। यीडा क्षेत्र में 100 से 125 एकड़ भूमि पर फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने का निर्णय इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दवाओं के निर्माण की इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

इससे उत्तर प्रदेश में फार्मा कंपनियों को नया आधार मिलेगा और दवा निर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप टेस्टिंग फैसिलिटी विकसित करने का फैसला भी महत्वपूर्ण है। इससे घरेलू कंपनियों को उत्पाद परीक्षण के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

किसानों को भी विकास में साझेदार बनाने की कोशिश

तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती किसानों के हितों को सुरक्षित रखना होती है। यीडा ने सहमति आधारित भूमि खरीद प्रक्रिया में किसानों के लिए दरों में 6 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है।

नई दर 4,558 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय की गई है।

यह कदम इस बात का संकेत है कि क्षेत्र के विकास में किसानों को केवल जमीन देने वाले पक्ष के रूप में नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के भागीदार के रूप में शामिल करने की कोशिश की जा रही है।

स्टेडियम, बस अड्डा और मंडी से बदलेगी जीवनशैली

जेवर क्षेत्र में सिर्फ उद्योग ही नहीं, बल्कि बेहतर जीवन सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

सेक्टर-23डी में करीब 50 एकड़ भूमि पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम की योजना खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगी। इससे स्थानीय युवाओं को खेल सुविधाएं मिल सकती हैं।

वहीं सेक्टर-23सी में इंटरस्टेट बस अड्डा बनने से जेवर एयरपोर्ट और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

किसानों के लिए सेक्टर-34 में आधुनिक मंडी विकसित करने की योजना भी महत्वपूर्ण है, जिससे कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन की संभावना बढ़ेगी।

1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार

उत्तर प्रदेश सरकार लंबे समय से राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए जरूरी है कि राज्य में बड़े निवेश, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पैदा करने वाले उद्योग विकसित हों।

यीडा क्षेत्र की योजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं।

प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में प्राप्तियों में 90 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष: जेवर बनेगा यूपी का नया ग्रोथ इंजन

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में मंजूर हुए प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में जेवर की पहचान बदल सकते हैं। जहां कभी यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण इलाका माना जाता था, वहीं अब इसे उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीक के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

मेडिकल हब से लेकर ताइवान सिटी तक और फार्मा क्लस्टर से लेकर यूनिवर्सिटी टाउनशिप तक—ये परियोजनाएं मिलकर एक ऐसा आर्थिक मॉडल तैयार कर सकती हैं जिसमें निवेश, रोजगार और विकास एक साथ आगे बढ़ें।

जेवर एयरपोर्ट अब केवल उड़ानों का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक उड़ान का नया रनवे बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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