उत्तर प्रदेश को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने और ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार की अलख जगाने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुहिम अब धरातल पर रंग ला रही है। इसका सबसे ताजा और जीता-जागता उदाहरण बने हैं लखीमपुर खीरी जिले के ग्राम देवरिया निवासी रामलखन। कभी पूंजी के अभाव में संघर्ष करने वाले रामलखन आज न सिर्फ एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि अपने गांव के तीन अन्य परिवारों के लिए आजीविका का जरिया भी बन चुके हैं।
सफलता के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- योजना का नाम: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिली मदद।
- मिली वित्तीय सहायता: व्यवसाय शुरू करने के लिए मिला 10 लाख रुपये का ऋण।
- सफलता का पैमाना: प्रतिदिन 5 से 8 क्विंटल दूध का उत्पादन।
- सामाजिक प्रभाव: गांव के ही 3 ग्रामीणों को मिला परमानेंट रोजगार।
- शुद्ध मुनाफा: सारे खर्चे काटकर हर महीने ₹15,000 से ₹30,000 की नेट इनकम।
जब सपनों के आड़े आई पूंजी की दीवार
रामलखन के भीतर हमेशा से खुद का काम शुरू करने और परिवार को एक बेहतर जिंदगी देने का जज्बा था। वे डेयरी व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखना चाहते थे, लेकिन गांव के स्तर पर एक बड़ा सेटअप तैयार करने के लिए उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं थी। बिना किसी गॉडफादर या मजबूत वित्तीय बैकअप के व्यवसाय शुरू करना उनके लिए एक नामुमकिन सपने जैसा था।
PMEGP योजना बनी ‘टर्निंग पॉइंट’
रामलखन के संघर्ष के दिनों में जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से संचालित ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (PMEGP) उनके लिए तारणहार बनकर आया। योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने आवेदन किया। उनकी लगन और बेहतरीन बिजनेस प्लान को देखते हुए वर्ष 2024 में सरकार द्वारा 10 लाख रुपये का लोन मंजूर कर दिया गया।
10 लाख की पूंजी से ऐसे खड़ी की ‘मिल्क इकोनॉमी’
लोन की राशि हाथ में आते ही रामलखन ने पूरी योजना के साथ दुग्ध उत्पादन (Dairy Business) के क्षेत्र में निवेश किया। उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा आज सबके सामने है:
[10 लाख का लोन] ──► [डेयरी की शुरुआत] ──► [5-8 क्विंटल रोज़ाना दूध] ──► [₹30,000 तक मासिक शुद्ध लाभ]
बाजार पर पकड़: आज उनकी डेयरी से निकलने वाला शुद्ध दूध स्थानीय बाजारों में सप्लाई हो रहा है, जिससे इलाके के लोगों को शुद्ध उत्पाद मिल रहा है और स्थानीय बाजार भी मजबूत हो रहा है।
जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ बनने का सफर
रामलखन की कहानी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि उन्होंने सिर्फ अपना भला नहीं सोचा। आज उनकी डेयरी में गांव के ही 3 अन्य युवक काम कर रहे हैं। योगी सरकार की नीतियां आज युवाओं को नौकरी मांगने वालों (Job Seekers) की कतार से निकालकर, नौकरी देने वाले (Job Creators) के रूप में स्थापित कर रही हैं, और रामलखन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।