यूपी चुनाव से पहले राहुल की छात्र राजनीति पर सियासी संग्राम
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी जहां लगातार योगी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस भी छात्रों और युवाओं के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का 8 अगस्त को प्रयागराज में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि आयोजन के लिए बुक किए गए केपी ग्राउंड की अनुमति पहले निरस्त कर दी गई। फिर अनुमति जारी की गई। इस फैसले के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और मामला अब प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर चुनावी सियासत का मुद्दा बन गया है।
पहले क्यों रद्द हुई मैदान की बुकिंग?
कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट ने कार्यक्रम के लिए दी गई अनुमति वापस लेते हुए कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि न्यायालय के निर्देशों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है। ट्रस्ट के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष अपने आदेश में स्कूल और कॉलेज परिसरों के मैदानों का व्यावसायिक अथवा गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए उपयोग सीमित करने की बात कही थी, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके अलावा ट्रस्ट ने लगातार हो रही बारिश का हवाला भी दिया। उसके मुताबिक मैदान पूरी तरह गीला है और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से परिसर को नुकसान पहुंच सकता है। ट्रस्ट का कहना है कि अनुमति रद्द करने का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक और व्यावहारिक कारणों से लिया गया था।
कांग्रेस का आरोप- सरकार राहुल गांधी से घबरा गई
मैदान की बुकिंग रद्द होने के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। पार्टी का आरोप है कि जहां-जहां राहुल गांधी के कार्यक्रम प्रस्तावित होते हैं, वहां किसी न किसी बहाने से प्रशासनिक अड़चनें खड़ी कर दी जाती हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि समझ नहीं आता कि सरकार आखिर किस बात से डर रही है। उनका कहना है कि यदि विपक्ष के कार्यक्रमों को लगातार रोका जाएगा तो यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित संकेत नहीं है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक कार्यक्रमों को बाधित करने के लिए कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छात्रों से संवाद करने में आखिर किसे आपत्ति हो सकती है।
सपा भी कांग्रेस के समर्थन में उतरी
इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस के समर्थन में दिखाई दी। सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो किसी भी कार्यक्रम की अनुमति रोक सकती है, लेकिन लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचना से बचने के लिए विपक्षी दलों के कार्यक्रमों पर रोक लगाने का प्रयास कर रही है। सपा का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को समान अवसर मिलने चाहिए और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
बीजेपी का पलटवार- राहुल गांधी से डरने का सवाल ही नहीं
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह मामला अदालत के आदेश और नियमों के पालन से जुड़ा है, इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। राजस्थान से बीजेपी सांसद सतीश पूनिया ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उनसे तो बच्चे भी नहीं डरते। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को लेकर भाजपा को किसी प्रकार का राजनीतिक भय नहीं है। उनके अनुसार कांग्रेस पिछले कई वर्षों से अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है और अब हर प्रशासनिक फैसले को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी का दावा है कि यदि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किसी मैदान की अनुमति निरस्त हुई है तो उसे राजनीतिक षड्यंत्र कहना उचित नहीं होगा।
यूपी चुनाव से पहले छात्रों पर फोकस क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में युवाओं और छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी पिछले कुछ समय से लगातार छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं, बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा अपनी विकास योजनाओं और संगठनात्मक मजबूती के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। समाजवादी पार्टी भी अपने अलग राजनीतिक मुद्दों के जरिए सरकार को घेर रही है। ऐसे में छात्रों की राजनीति भी आगामी विधानसभा चुनाव का अहम मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।
सवाल सिर्फ मैदान का नहीं, लोकतांत्रिक राजनीति का भी
प्रयागराज में राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर पैदा हुआ विवाद अब केवल एक मैदान की बुकिंग तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं और अदालत के आदेशों का पालन करना आवश्यक है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम क्या गुल खिलाता है।
इतना तय है कि इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक पक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल बता रहा है तो दूसरा इसे कानून और नियमों के पालन का मामला मान रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजनीतिक विमर्श को और तेज कर सकता है।





