नेतृत्व को लेकर बढ़ी खींचतान
पंजाब कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी विवादों को लेकर चर्चा में है। पार्टी ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा था कि इससे संतुलन बनेगा, लेकिन इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष और खुलकर सामने आने लगा है।
2027 का चेहरा कौन होगा?
विवाद केवल पदों का नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा कौन होगा, इस सवाल का है। चन्नी समर्थक उनकी जनस्वीकार्यता और ज़मीनी पकड़ को मजबूत मानते हैं, जबकि राजा वड़िंग को संगठन को दोबारा खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर दो स्पष्ट गुट दिखाई देने लगे हैं।
क्या कांग्रेस फिर दोहराएगी पुरानी गलतियां?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस लंबे समय से नेतृत्व संघर्ष से जूझ रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू के विवाद ने पार्टी को पहले ही नुकसान पहुंचाया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस पिछली गलतियों से सबक लेगी या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा।
आने वाले महीने तय करेंगे भविष्य
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यदि मतभेद इसी तरह बने रहे, तो इसका असर सीधे 2027 के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि अपनी एकजुटता को साबित करना है।