देश की सबसे बड़ी जल सुरंग बनकर तैयार
मध्यप्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे बड़ी जल सुरंग बनकर तैयार हो चुकी है। करीब 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग को तैयार करने में लगभग 17 साल का समय लगा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 1600 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसे मध्यप्रदेश के इंजीनियरों और हजारों मजदूरों की मेहनत का प्रतीक माना जा रहा है। यह सुरंग आने वाले वर्षों में प्रदेश के कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाली है।
पांच जिलों और 1500 गांवों को मिलेगा लाभ
इस जल सुरंग के माध्यम से नर्मदा नदी का पानी प्रदेश के पांच जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लगभग 1500 गांवों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा। सरकार का दावा है कि इस परियोजना के शुरू होने से हजारों किसानों की आय में वृद्धि होगी और खेती के लिए पानी की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। सबसे खास बात यह है कि सुरंग के भीतर पानी को किसी पंप की मदद से नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण बल के जरिए दूसरी ओर पहुंचाया जाएगा, जिससे ऊर्जा की भी बचत होगी।
आसान नहीं था निर्माण का सफर
इस सुरंग का निर्माण इंजीनियरों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। नर्मदा नदी सतपुड़ा और विंध्य पर्वतमाला के बीच बहती है। ऐसे में विंध्य पर्वत को काटकर सुरंग बनाना बेहद कठिन कार्य था। निर्माण के दौरान कई बार सुरंग में पानी भर गया, महंगी विदेशी मशीनें खराब हो गईं और कई मजदूरों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ा। कई ऐसे मौके भी आए, जब मजदूर अपने घर वापस नहीं लौट सके। इसके बावजूद परियोजना से जुड़े लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और लगभग दो दशक की मेहनत के बाद इसे पूरा कर दिखाया।
पौराणिक कथा से जुड़ रहा आधुनिक विज्ञान
नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवन रेखा माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नर्मदा और सोन नदी का विवाह होना था, लेकिन किसी कारणवश नर्मदा रूठकर पश्चिम की ओर बहने लगी। अब आधुनिक तकनीक और इंजीनियरिंग की मदद से नर्मदा के जल को सोन बेसिन की दिशा में पहुंचाया जा रहा है। यही वजह है कि लोग इसे पौराणिक कथा और आधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम भी कह रहे हैं। यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के विकास, तकनीकी क्षमता और किसानों के बेहतर भविष्य का प्रतीक बनकर सामने आई है।