पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत सरकार जम्मू-कश्मीर का पाकिस्तान के कब्जे वाला हिस्सा मानती है। भारतीय सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पाकिस्तान के नियंत्रण में जम्मू-कश्मीर का करीब 78,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र है। इसमें पाकिस्तान प्रशासित आजाद जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल किए जाते हैं।
PoK का इतिहास और 1947 में क्या हुआ
1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ विलय पत्र यानी Instrument of Accession पर हस्ताक्षर किए, जिसे अगले दिन भारत के गवर्नर जनरल ने स्वीकार किया। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित कबायली हमला हुआ था और भारत ने सैन्य सहायता भेजी। बाद में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम हुआ और जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में रह गया। संयुक्त राष्ट्र ने 1948 में संघर्ष और युद्धविराम से जुड़े प्रस्ताव पारित किए थे।
PoK में लोग क्यों कर रहे हैं आंदोलन
2026 में PoK में आंदोलन का प्रमुख चेहरा जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) रहा है। आंदोलन की शुरुआत महंगाई, बिजली के बिल, आटे और आर्थिक सुविधाओं जैसे मुद्दों से जुड़ी रही, लेकिन बाद में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल प्रमुख बन गया। JAAC की मुख्य मांगों में पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म करना शामिल है। संगठन का कहना है कि इन सीटों से बाहरी राजनीतिक प्रभाव बढ़ता है।
आंदोलनकारी और क्या मांग रहे हैं
JAAC के व्यापक मांग-पत्र में आर्थिक राहत, सामाजिक सेवाओं, बुनियादी ढांचे में सुधार और सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। 2026 के आंदोलन के दौरान इंटरनेट सेवाओं पर लंबे समय तक प्रतिबंध रहा और कई इलाकों में चुनाव भी प्रभावित हुए। अगस्त में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में कराए गए, जबकि Poonch क्षेत्र की कुछ सीटों पर सुरक्षा कारणों से मतदान टालना पड़ा। सितंबर में भी कुछ इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई।
भारत के लिए आंदोलन का क्या असर हो सकता है
PoK में जारी असंतोष का भारत पर सीधा और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह का असर हो सकता है। एक तरफ स्थानीय लोगों की राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक मांगें सामने आने से पाकिस्तान प्रशासित क्षेत्र की स्थिति अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनती है। दूसरी तरफ लंबे समय तक हिंसा, इंटरनेट बंदी और राजनीतिक अस्थिरता से नियंत्रण रेखा के आसपास सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। इसलिए भारत के लिए इस घटनाक्रम का महत्व मुख्यतः क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा की स्थिति और कश्मीर से जुड़े कूटनीतिक विमर्श के संदर्भ में देखा जा सकता है। आंदोलन से भारत को निश्चित लाभ या नुकसान होगा, ऐसा निष्कर्ष निकालने के बजाय इसके बदलते सुरक्षा और राजनीतिक प्रभावों पर नजर रखना जरूरी है।