शादी में नहीं बांटे सिर्फ तोहफे… 3500 ग्रामीणों को दे दी सुरक्षा की गारंटी, PM मोदी ने ‘मन की बात’ में की परिवार की तारीफ
शादियों में करोड़ों की सजावट, आतिशबाजी और शाही दावतें तो अक्सर देखने को मिलती हैं… लेकिन महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के एक परिवार ने शादी को समाजसेवा का ऐसा माध्यम बनाया कि उसकी गूंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ तक पहुंच गई। बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार ने अपने बेटे की शादी में मेहमानों को सिर्फ भोजन नहीं कराया, बल्कि पूरे गांव के 3500 लोगों को एक लाख रुपये तक का बीमा सुरक्षा कवच देकर नई मिसाल कायम कर दी।
- शादी बनी समाजसेवा की मिसाल
- 3500 ग्रामीणों को मिला बीमा कवच
- PM मोदी ने की खुलकर सराहना
- खर्च नहीं, सुरक्षा पर लगाया दांव
- एक परिवार, पूरे गांव की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में इस अनोखी पहल का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के लिए सोचने वाले ऐसे परिवार देश के लिए प्रेरणा हैं। पीएम ने कहा कि पेठकर परिवार ने शादी को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर एक ऐसा संदेश दिया है, जिसे पूरे देश को अपनाना चाहिए।
बहादुरपुरा गांव में करीब 3600 लोग रहते हैं। यहां अधिकांश परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। गांव में अक्सर सांप काटने, जंगली जानवरों के हमले, सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं जैसी घटनाएं होती रहती हैं। आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार समय पर इलाज भी नहीं करा पाते। इसी परेशानी को देखते हुए पेठकर परिवार ने शादी के अवसर पर गांव के मतदाता सूची में शामिल करीब 3500 लोगों का एक लाख रुपये तक का बीमा कराने का फैसला किया।
दूल्हे के बड़े भाई अनूप पेठकर का कहना है कि उनका परिवार हमेशा समाजहित में काम करने की सोच रखता है। इससे पहले भी परिवार ने हेलमेट वितरण और बीमा शिविर आयोजित कर एक ही दिन में करीब 900 लोगों का बीमा कराया था। इस बार उन्होंने शादी को समाजसेवा से जोड़ते हुए पूरे गांव को सुरक्षा देने का संकल्प लिया।
दूल्हे सिद्धेश्वर पेठकर का कहना है कि उन्होंने गांव के किसानों और गरीब परिवारों की परेशानियों को करीब से देखा है। कई बार दुर्घटना के बाद इलाज के लिए पैसे नहीं होते, इसलिए शादी के सबसे बड़े अवसर को गांव के लिए “सुरक्षा का उपहार” बनाने का फैसला लिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी की सराहना मिलने के बाद अब यह पहल पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। पेठकर परिवार का संदेश साफ है—यदि शादी जैसे आयोजनों का एक हिस्सा समाज की भलाई के लिए समर्पित किया जाए, तो हजारों लोगों की जिंदगी सुरक्षित और बेहतर बनाई जा सकती है।
एक तरफ जहां शादियों में दिखावे पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं… वहीं महाराष्ट्र के इस परिवार ने साबित कर दिया कि असली शान खर्च में नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए काम में होती है। शायद यही वजह है कि अब इस शादी की चर्चा सिर्फ गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में हो रही है।