गुरु अस्त और चातुर्मास के कारण विवाह पर विराम, नवंबर-दिसंबर में मिलेंगे 10 शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली। हर वर्ष भड़लिया (भड़रिया) नवमी को विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए सबसे शुभ एवं अबूझ मुहूर्त माना जाता है। लेकिन वर्ष 2026 में यह परंपरा टूट गई है। इस बार भड़लिया नवमी पर विवाह के शुभ योग नहीं बने। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु (बृहस्पति) के अस्त होने और चातुर्मास की शुरुआत के कारण विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। ऐसे में जिन परिवारों की शादी भड़लिया नवमी पर प्रस्तावित थी, उन्हें अब नवंबर तक इंतजार करना होगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 20 जुलाई से गुरु अस्त हो चुके हैं। हिंदू मान्यताओं में गुरु को विवाह, संतान और शुभ कार्यों का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु अस्त रहने के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन और अन्य मांगलिक संस्कार सामान्यतः नहीं किए जाते। इसके बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाता है, जिसमें भी अधिकांश परंपराओं के अनुसार विवाह नहीं होते। आगे धनुर्मास के कारण भी विवाह पर रोक रहती है।
इसी वजह से अब विवाह का नया शुभ दौर नवंबर के उत्तरार्ध से शुरू होगा। उपलब्ध पंचांग के अनुसार नवंबर 2026 में 20, 21, 22, 25 और 26 नवंबर को विवाह के शुभ मुहूर्त हैं। वहीं दिसंबर 2026 में 2, 3, 5, 11 और 12 दिसंबर को विवाह के लिए शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी।
हालांकि, भड़लिया नवमी का धार्मिक महत्व पहले की तरह बना । इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा, कुलदेवी-देवताओं की आराधना, दान-पुण्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
नोट: विवाह की अंतिम तिथि तय करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें, क्योंकि क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार तिथियों में अंतर हो सकता है।