बॉलीवुड में बदल रहा है दर्शकों का मूड… बड़े सितारों के बीच आस्था की कहानियों ने बनाई अलग जगह… ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद अब ‘तेरा साईं’ पर नजर बॉक्स ऑफिस पर इस वक्त सिर्फ बड़े बजट, बड़े सितारे और महंगे प्रमोशन ही चर्चा में नहीं हैं। एक अलग तरह की कहानी ने इंडस्ट्री को सोचने पर मजबूर कर दिया है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ का 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार करना इस बात का संकेत है कि दर्शक कंटेंट के लिए थिएटर तक पहुंचने को तैयार हैं—अगर कहानी उनके विश्वास और भावनाओं से जुड़ती हो।
फिल्म की शुरुआत भी किसी बड़ी ब्लॉकबस्टर जैसी नहीं थी। सीमित स्क्रीन पर रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन करीब 10 लाख रुपये की कमाई की। लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ ने धीरे-धीरे फिल्म की रफ्तार बढ़ाई। यही इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट है। न स्टारडम… न सैकड़ों करोड़ का बजट… फिर भी बॉक्स ऑफिस पर बड़ा असर। यहीं से एक सवाल खड़ा होता है—क्या हिंदी सिनेमा में भक्ति और आध्यात्मिक फिल्मों के लिए नया बाजार तैयार हो रहा है?
अब ‘तेरा साईं’ की बारी
‘हनुमान अंश’ की सफलता के बीच अब नजर ‘तेरा साईं’ पर है। फिल्म में संजय मिश्रा साईं बाबा की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन पलाश मुच्छल ने किया है। मेकर्स ने शिरडी में साईं बाबा का आशीर्वाद लेने के बाद रिलीज डेट का ऐलान किया है। फिल्म 5 फरवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इसे हिंदी के अलावा मराठी, तमिल और तेलुगु में रिलीज करने की तैयारी है। यानी मेकर्स इसे सिर्फ हिंदी बेल्ट की फिल्म बनाकर सीमित नहीं रखना चाहते। साईं बाबा की व्यापक लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म का दायरा भी बड़ा रखा गया है।
क्या बॉलीवुड को मिल गया नया फॉर्मूला?
पिछले कुछ समय में धार्मिक, आध्यात्मिक और भारतीय परंपराओं से जुड़ी कहानियों ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई है। अब इस कड़ी में ‘हनुमान अंश’ की सफलता को एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इसके बाद अगर ‘तेरा साईं’ भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन करती है तो इंडस्ट्री के लिए यह महज एक फिल्म की सफलता नहीं होगी। यह मेकर्स के लिए एक नए कंटेंट मॉडल का संकेत हो सकता है। आस्था + मजबूत कहानी + भावनात्मक जुड़ाव = थिएटर में दर्शक। और अगर यह समीकरण बार-बार काम करता है, तो आने वाले समय में भक्ति और आध्यात्मिक सिनेमा का निर्माण बढ़ना तय माना जा सकता है।
राधा-कृष्ण पर करण जौहर की नजर
इस ट्रेंड को और दिलचस्प नाती है करण जौहर की कथित तौर पर राधा-कृष्ण की कहानी पर फिल्म बनाने की तैयारी। अगर बड़े बैनर और बड़े निर्माता भी भारतीय धार्मिक और आध्यात्मिक कथाओं की तरफ बढ़ते हैं, तो साफ है कि बाजार इस जॉनर को गंभीरता से देख रहा है। यानी एक तरफ स्टार पावर वाली फिल्मों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ आस्था आधारित सिनेमा अपनी अलग ऑडियंस तैयार कर रहा है।
लेकिन सिर्फ आस्था से नहीं चलेगी फिल्म
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी धार्मिक या संत की कहानी अपने आप हिट हो सकती है? जवाब है—नहीं। ‘हनुमान अंश’ की सफलता को हर धार्मिक फिल्म की गारंटी नहीं माना जा सकता। दर्शक आस्था के साथ कहानी, अभिनय, स्क्रीनप्ले, प्रस्तुति और भावनात्मक प्रभाव भी देखता है। यही ‘तेरा साईं’ की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। साईं बाबा करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में किरदार को पर्दे पर उतारते समय संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण होगी। कहानी अगर दर्शकों के भावनात्मक संसार से जुड़ती है तो फिल्म के लिए यह बड़ी ताकत बन सकती है। लेकिन अगर प्रस्तुति कमजोर रही तो सिर्फ धार्मिक विषय फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर नहीं बचा पाएगा।
संजय मिश्रा होंगे बड़ा फैक्टर
‘तेरा साईं’ की कास्टिंग भी चर्चा का विषय है। संजय मिश्रा को साईं बाबा के किरदार में देखना दर्शकों के लिए अलग अनुभव हो सकता है। उनकी अभिनय शैली में सहजता और किरदार की आंतरिक भावनाओं को पकड़ने की क्षमता उन्हें इस भूमिका के लिए दिलचस्प चुनाव बनाती है। अब सवाल यह है कि क्या वह साईं बाबा की लोकप्रिय छवि को सिर्फ निभाएंगे या पर्दे पर ऐसा व्यक्तित्व गढ़ पाएंगे, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ जाएं?
‘हनुमान अंश’ की असली विरासत क्या होगी?
दरअसल ‘हनुमान अंश’ की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ 100 करोड़ का आंकड़ा नहीं है। असली उपलब्धि यह है कि इसने छोटे बजट की आस्था आधारित फिल्म के लिए बड़े बॉक्स ऑफिस की संभावना दिखाई है। अगर ‘तेरा साईं’ भी सफल होती है, तो यह संभावना और मजबूत होगी। फिर सवाल सिर्फ यह नहीं रहेगा कि कौन-सा सुपरस्टार अगली बड़ी फिल्म दे रहा है। सवाल यह भी होगा कि कौन-सी आस्था की कहानी दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच रही है। 5 फरवरी 2027 को ‘तेरा साईं’ की परीक्षा होगी। अगर फिल्म दर्शकों के दिल तक पहुंच गई, तो संभव है कि बॉक्स ऑफिस पर एक नया ट्रेंड और मजबूत हो—जहां स्टार से बड़ी कहानी होगी… बजट से बड़ी आस्था होगी… और स्क्रीन पर मनोरंजन के साथ विश्वास भी बिकेगा। अब देखना यही है— क्या ‘हनुमान अंश’ सिर्फ एक अपवाद थी, या भक्ति फिल्मों के नए बॉक्स ऑफिस युग की शुरुआत?