1600 करोड़ की जल क्रांति
मध्यप्रदेश के कटनी जिले में बन रही देश की सबसे लंबी वाटर टनल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। करीब 17 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा, तकनीकी चुनौतियों और हजारों इंजीनियरिंग घंटों के बाद 11.95 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद टनल लगभग तैयार है। 799 करोड़ रुपये से शुरू हुई यह परियोजना अब करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसके पूरा होते ही प्रदेश के पांच जिलों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।
नर्मदा का पानी पहुंचेगा सूखे इलाकों तक
बरगी व्यपवर्तन योजना के तहत तैयार की जा रही यह सुरंग नर्मदा नदी के पानी को विंध्य पर्वतमाला के नीचे से निकालकर जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों तक पहुंचाएगी। कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जैसे जिलों के किसानों और लाखों लोगों को इससे सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलेगी। यह पहली बार होगा जब नर्मदा का जल इस मार्ग से विंध्य क्षेत्र में पहुंचेगा।
जब अमेरिकी मशीन भी हार गई
परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू इसकी भूगर्भीय संरचना रही। संगमरमर, चूना पत्थर, डोलोमाइट और स्लेट की परतों के बीच खुदाई करना आसान नहीं था। वर्ष 2011 में अमेरिका से लाई गई अत्याधुनिक रोबिन्स टनल बोरिंग मशीन शुरुआती चरण में ही खराब हो गई। पहले 1.6 किलोमीटर की खुदाई पूरी करने में ही साढ़े छह साल का समय लग गया। बाद में जर्मन तकनीक और नई मशीनों की मदद से काम को गति मिली।
300 से ज्यादा सिंक होल बने
टनल निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कई अप्रत्याशित मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 300 से अधिक बार जमीन धंसने यानी सिंक होल बनने की घटनाएं हुईं। कई स्थानों पर जहरीली गैस निकली, कहीं पानी का तेज रिसाव हुआ तो कहीं मिट्टी धंसने से निर्माण कार्य रोकना पड़ा। इन चुनौतियों ने परियोजना की गति को लगातार प्रभावित किया।
विस्थापन और मजदूरों का संघर्ष
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए लगभग 80 परिवारों का पुनर्वास किया गया। निर्माण के दौरान कई मजदूरों ने अपनी जान भी गंवाई। कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे श्रमिकों और इंजीनियरों के प्रयासों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया है।
अब सिर्फ 85 मीटर की दूरी बाकी
कटनी मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्लीमनाबाद क्षेत्र में जमीन से 80 से 100 फीट नीचे बन रही इस सुरंग में अब महज 85 मीटर के आसपास खुदाई शेष है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों का लक्ष्य जून के अंत तक टनल की खुदाई पूरी करना है। इसके बाद परीक्षण और जल प्रवाह की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पांच जिलों की बदलेगी तस्वीर
करीब 197 किलोमीटर लंबी नहर, पाइपलाइन और टनल नेटवर्क से जुड़ी यह परियोजना हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी। इससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, भूजल पर निर्भरता कम होगी और पेयजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी।
मध्यप्रदेश के जल इतिहास का नया अध्याय
17 साल का इंतजार, विदेशी मशीनों की नाकामी, सैकड़ों तकनीकी बाधाएं और बढ़ती लागत के बावजूद स्लीमनाबाद वाटर टनल अब सफलता की दहलीज पर खड़ी है। आने वाले महीनों में जब नर्मदा का पानी विंध्य पर्वतमाला के नीचे से गुजरकर खेतों और घरों तक पहुंचेगा, तब यह परियोजना सिर्फ एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं बल्कि मध्यप्रदेश की जल सुरक्षा और कृषि विकास की नई पहचान बन जाएगी।





