संसद सत्र में सियासी संग्राम…वोटर लिस्ट, ऑपरेशन सिंदूर और आयकर कानून पर गरमाएंगे मुद्दे…निशाने पर रहेगा बिहार इलेक्शन
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। इस बार सरकार आठ नए विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है। इनमें सबसे प्रमुख नया आयकर कानून हो सकता है, जिसे लेकर उद्योग जगत और मध्यम वर्ग के बीच उत्सुकता है। इसके अलावा वक्फ कानून में संशोधन और कुछ नीतिगत प्रस्ताव भी लाए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, ताकि सत्र के संचालन के लिए सभी दलों से सहयोग सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि सत्र के दौरान विपक्षी गठबंधन के दल पूरे दम के साथ सरकार को घेरने की तैयारी में है।
- मानसून सत्र का एजेंडा: आठ विधेयकों की दस्तक
- बिहार की मतदाता सूची संशोधन पर हंगामे के आसार
- सरकार और विपक्ष के निशाने पर बिहार चुनाव होगा
- 21 जुलाई से प्रारंभ होगा जो अगले माह 21 अगस्त तक चलेगा
- सत्र में वोटर लिस्ट रिवीजन पर हो सकता है हंगामा
- सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों रखेंगे अपनी बात को मजबूती के साथ
- संसद के अंदर और बाहर बढ़त बनाने की होगी कोशिश
वोटर लिस्ट विवाद: बिहार बना राजनीतिक रणक्षेत्र
इस सत्र में सबसे अधिक हंगामा मतदाता सूची विशेष संशोधन (Voter List Special Revision) को लेकर होने की संभावना है। बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटे जाने के आरोप लगे हैं। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। दूसरी ओर, भाजपा वोटर लिस्ट में नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिकों के नाम दर्ज होने की बात कहकर पलटवार कर सकती है।
टीडीपी, जो एनडीए का हिस्सा है, उसने भी इस संशोधन प्रक्रिया पर सवाल उठाकर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर तीखी बहस की आशंका है।
ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम पारदर्शिता
विपक्ष लंबे समय से “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर चर्चा की मांग करता रहा है। यह ऑपरेशन कथित तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, और इसी कारण सरकार इस पर खुलकर चर्चा से बचती रही है। लेकिन अब विपक्ष का कहना है कि यह महज एक आड़ है और असली मुद्दों को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस बार यह मुद्दा संसद में सरकार बनाम विपक्ष के बीच गंभीर टकराव का कारण बन सकता है।
सत्ता पक्ष इसे पूरी तरह एक रणनीतिक व गोपनीय मसला बताते हुए संसद में चर्चा को टालने का प्रयास कर सकता है, लेकिन विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का विषय बता कर सदन में दबाव बना सकता है।
ओडिशा उत्पीड़न मामला: संसद तक पहुंचेगा जन आक्रोश
ओडिशा में एक छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बीजू जनता दल (BJD) के नेतृत्व में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और बंद से राज्य में जनाक्रोश का माहौल बन गया है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष संसद में जोरदार चर्चा की मांग कर सकता है।
यदि सरकार इस पर गंभीर रुख नहीं अपनाती, तो यह मामला संसद में भी विवाद का कारण बन सकता है। खासकर जब अन्य विपक्षी दल, जैसे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दल, इसे महिला सुरक्षा के सवाल से जोड़कर पेश करेंगे।
न्यायपालिका पर वार? पूर्व जज पर महाभियोग प्रस्ताव
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने की संभावित तैयारी से संसद सत्र और गरम हो सकता है। यदि सरकार यह प्रस्ताव लाती है तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब किसी पूर्व जज पर महाभियोग चलाया जाएगा। हालांकि विपक्षी दलों में इस मुद्दे पर मतभेद हो सकते हैं। कुछ इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला मान सकते हैं, तो कुछ दल सरकार के साथ खड़े हो सकते हैं। यह विषय न केवल कानूनी बहस बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काफी गूढ़ साबित होगा।
संसद का यह मानसून सत्र कई दृष्टियों से ऐतिहासिक हो सकता है। मतदाता सूची विवाद से लेकर न्यायपालिका पर कार्रवाई, और नए कानूनों की पेशकश से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों तक, यह सत्र सत्ता और विपक्ष के बीच रणनीतिक संघर्ष का मंच बन सकता है। जहां एक ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इन मुद्दों के ज़रिए जनमत को प्रभावित करने की पूरी कोशिश में रहेगा। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर राजनीतिक हलचल तेज़ रहेगी। ।…(प्रकाश कुमार पांडेय)





