मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार सुस्त, बढ़ा इंतजार…अगले 3-4 दिन उमस और गर्मी से राहत नहीं

Monsoon in Madhya Pradesh

मानसून की राह देख रहा मध्यप्रदेश, बढ़ी किसानों और आम लोगों की चिंता

मध्यप्रदेश में मानसून का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। जून का तीसरा सप्ताह समाप्ति की ओर है, लेकिन अभी तक प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक एंट्री नहीं हो सकी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन से चार दिनों तक भी मानसून के प्रदेश में प्रवेश की संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में लोगों को फिलहाल उमस भरी गर्मी और बेचैनी का सामना करना पड़ेगा।

प्रदेश में सामान्य तौर पर मानसून 15 से 16 जून के बीच दस्तक दे देता है, लेकिन इस वर्ष मानसून निर्धारित समय से पीछे चल रहा है। इसका असर न केवल मौसम पर बल्कि खेती-किसानी की तैयारियों पर भी दिखाई देने लगा है।

महाराष्ट्र में थमा मानसून, मध्यप्रदेश की बढ़ी प्रतीक्षा

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के दक्षिणी और कुछ मध्य हिस्सों तक पहुंचने के बाद फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाया है। दूसरी ओर ओडिशा और बिहार की दिशा में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं।

छत्तीसगढ़ के दक्षिणी क्षेत्रों तक मानसून पहुंच चुका है और वहां बारिश की गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। हालांकि मध्यप्रदेश की सीमा तक मानसूनी प्रभाव पहुंचने के बावजूद प्रदेश में इसकी पूर्ण एंट्री अभी बाकी है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए 23 या 24 जून के बाद ही मानसून की प्रगति को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ पाएगी।

अगले कुछ दिन उमस भरी गर्मी करेगी परेशान

मानसून में देरी का सीधा असर तापमान और वातावरण की नमी पर पड़ रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों तक प्रदेश के तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। फिलहाल प्रदेश में न्यूनतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जबकि अधिकतम तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। नमी बढ़ने के कारण गर्मी अधिक महसूस हो रही है। दिन के समय तेज धूप और शाम के समय उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

बारिश हो रही है, लेकिन यह मानसून नहीं

प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से आंधी, गरज-चमक और हल्की बारिश की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। इससे कई लोगों को यह भ्रम हो रहा है कि मानसून पहुंच चुका है, लेकिन मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह मानसूनी बारिश नहीं है।

चक्रवाती परिसंचरण से बन रहे बारिश के हालात

मौसम विभाग के डायरेक्टर अजय कुमार सिंह के अनुसार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसी वजह से कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की स्थिति बन रही है। इन गतिविधियों से तापमान में थोड़ी अस्थायी राहत जरूर मिलती है, लेकिन इससे मानसून की औपचारिक शुरुआत नहीं मानी जाती।

एल-नीनो भी बन रहा देरी की वजह

मौसम विशेषज्ञ मानसून की धीमी प्रगति के पीछे एल-नीनो प्रभाव को भी एक प्रमुख कारण मान रहे हैं। एल-नीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जिसका असर प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव के रूप में दिखाई देता है। इसका प्रभाव भारतीय मानसून पर भी पड़ता है। सामान्यतः एल-नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर पड़ सकता है या उसकी गति धीमी हो सकती है। इसी कारण इस वर्ष मानसून की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।

किसानों की निगाहें आसमान पर

मानसून में देरी का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में किसान खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी कर चुके हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश के इंतजार में खेतों में काम शुरू नहीं हो पा रहा है। यदि अगले सप्ताह तक मानसून सक्रिय होता है तो बुआई कार्य तेजी पकड़ सकता है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अभी घबराने जैसी स्थिति नहीं है और जून के अंतिमसप्ताह में परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं।

क्या है आगे का अनुमान?

मध्यप्रदेश में मानसून का इंतजार फिलहाल और बढ़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिन प्रदेशवासियों को उमस भरी गर्मी झेलनी पड़ सकती है। हालांकि प्री-मानसून गतिविधियों के कारण कहीं-कहीं बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा। अब प्रदेश की नजरें जून के अंतिम सप्ताह पर टिकी हैं, जब मानसून की रफ्तार तेज होने और मध्यप्रदेश में उसके प्रवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

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