इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों में छाए मानसूनी बादल, लेकिन हर जगह बारिश क्यों नहीं?..जानें सैटेलाइट कैसे पहचानते हैं बारिश वाले बादल?

Monsoon clouds are visible in ISRO

भारत में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के INSAT-3DR मौसम उपग्रह की ताजा तस्वीरों में देश के लगभग दो-तिहाई हिस्से पर बादलों का व्यापक फैलाव नजर आ रहा है। हालांकि, सवाल यह है कि जब इतना बड़ा क्षेत्र बादलों से ढका है, तब हर जगह बारिश क्यों नहीं हो रही? इसका जवाब मौसम विज्ञान और सैटेलाइट तकनीक में छिपा है।

  1. दो-तिहाई भारत पर बादलों की चादर
  2. सैटेलाइट कैसे पहचानते हैं बारिश वाले बादल?
  3. ठंडे बादल देते हैं भारी बारिश का संकेत
  4. हर बादल बरसता नहीं, जानिए वजह
  5. अगले 5 दिन कई राज्यों में भारी बारिश के आसार

सैटेलाइट बादलों को कैसे देखते हैं?

INSAT-3DR लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोस्टेशनरी कक्षा में स्थापित है। यह पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ घूमता है, इसलिए भारत के ऊपर लगातार नजर बनाए रखता है। यह हर 30 मिनट में नई तस्वीरें और मौसम संबंधी आंकड़े भेजता है।

दिन के समय उपग्रह दृश्य (Visible) कैमरे से बादलों की तस्वीरें लेता है, जबकि रात में इन्फ्रारेड (Infrared) सेंसर का उपयोग करता है। यही सेंसर बादलों के ऊपरी हिस्से का तापमान भी मापते हैं।

बादलों का तापमान क्यों है महत्वपूर्ण?

मौसम वैज्ञानिक बादलों के ऊपरी हिस्से के तापमान को क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर कहते हैं।

  • -40°C से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज-चमक का संकेत देते हैं।
  • -70°C या उससे कम तापमान वाले बादल अत्यधिक शक्तिशाली तूफानों और मूसलाधार बारिश की संभावना दर्शाते हैं।

ताजा सैटेलाइट डेटा में जम्मू-कश्मीर के ऊपर कुछ बादलों का तापमान -80°C तक दर्ज किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, मेघालय, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के ऊपर भी ऊंचे और ठंडे बादल दिखाई दिए हैं।

हर जगह बारिश क्यों नहीं हो रही?

आसमान में बादल दिखाई देने का मतलब यह नहीं कि हर बादल बारिश करेगा।

बारिश तभी होती है जब बादलों में पर्याप्त नमी, ऊंचाई और ऊर्ध्वाधर विकास (Vertical Development) हो। कई बादल केवल नमी लेकर चलते हैं या हल्की फुहार देते हैं। यही कारण है कि एक जिले में मूसलाधार बारिश हो सकती है, जबकि उससे कुछ किलोमीटर दूर धूप खिली रहती है।

अगले कुछ दिनों में कहां होगी बारिश?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले 4–5 दिनों तक उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सक्रिय रहेगा।

भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना:

  • जम्मू-कश्मीर
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • असम
  • मेघालय

इन क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं की भी संभावना जताई गई है।

देश में बारिश की स्थिति कैसी है?

देश में अब तक मानसून की कुल वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई है। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत है। कुछ राज्यों में सामान्य या अधिक बारिश हुई है, जबकि कई क्षेत्रों में अब भी वर्षा की कमी बनी हुई है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ा था, लेकिन अब इसके दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं।

किसानों के लिए क्या मायने हैं?

जहां अच्छी बारिश हो रही है, वहां खरीफ फसलों को लाभ मिलेगा। लेकिन जिन इलाकों में अभी भी वर्षा कम है, वहां बुवाई और फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यदि अगले कुछ दिनों में पूर्वानुमान के अनुसार अच्छी बारिश होती है तो कृषि क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद है

इसरो की सैटेलाइट तस्वीरें यह जरूर दिखाती हैं कि देश के बड़े हिस्से में मानसूनी बादल सक्रिय हैं, लेकिन केवल बादलों की मौजूदगी से बारिश तय नहीं होती। बादलों की ऊंचाई, तापमान, नमी और संरचना यह तय करती है कि कहां हल्की फुहार होगी और कहां मूसलाधार बारिश। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल मानसून फिर से रफ्तार पकड़ रहा है और उत्तर, पूर्व तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की संभावना बनी हुई है।

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