मोहन सरकार में आधी रात को IAS-IPS ट्रांसफर क्यों? 26 अफसरों के तबादले से प्रशासनिक हलचल तेज
देर रात जारी हुई सूची, अफसरों को सुबह मिली खबर
मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के दौरान एक बार फिर आधी रात को प्रशासनिक तबादलों की सूची जारी होने से हलचल मच गई। गुरुवार देर रात 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए गए, जिनमें 14 कलेक्टरों को इधर-उधर किया गया। खास बात यह रही कि कई अफसरों को अपने तबादले की जानकारी सुबह नींद खुलने के बाद मिली। यह पहली बार नहीं है, जब रात 12 बजे के बाद मंत्रालय खोलकर इस तरह के फैसले लिए गए हों।
भोपाल कलेक्टर बदलने पर बनी सहमति
इस तबादला सूची में सबसे अहम बदलाव भोपाल कलेक्टर पद को लेकर हुआ। 2013 बैच के आईएएस प्रियंक मिश्रा को नया भोपाल कलेक्टर बनाया गया है। वे इससे पहले धार में करीब तीन साल चार महीने तक कलेक्टर रहे, जो किसी जिले में लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड माना जा रहा है। वहीं, मौजूदा कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, साथ ही उन्हें टीएंडसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
एक हफ्ते में चार बैठकें, फिर बनी सहमति
सूत्रों के मुताबिक, तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच एक सप्ताह में चार बार बैठक हुई। गुरुवार को भी सुबह और शाम दो दौर की चर्चा के बाद नामों पर अंतिम सहमति बन पाई। बताया जा रहा है कि भोपाल कलेक्टर और कमिश्नर जैसे अहम पदों पर लंबे समय तक सहमति नहीं बन पा रही थी। आखिरकार कई दौर की चर्चा के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया और देर रात जारी किया गया।
चुनाव ड्यूटी और प्रशासनिक संतुलन बना वजह
आधी रात को ट्रांसफर आदेश जारी करने के पीछे एक बड़ी वजह प्रशासनिक संतुलन और चुनावी ड्यूटी को माना जा रहा है। कुछ अधिकारी फिलहाल चुनाव कार्य में व्यस्त हैं, इसलिए उनके स्थान पर नियुक्ति को लेकर समय और समन्वय की जरूरत थी। इसी कारण सूची को अंतिम रूप देने में देरी हुई और देर रात आदेश जारी किए गए। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के फैसले गोपनीयता और प्रशासनिक रणनीति के तहत भी लिए जाते हैं, ताकि किसी प्रकार का दबाव या हस्तक्षेप न हो।
प्रदर्शन के आधार पर मिला इनाम और नई जिम्मेदारियां
प्रियंक मिश्रा को धार में लंबे और प्रभावी कार्यकाल के साथ-साथ भोजशाला मामले में बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन के चलते भोपाल जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वहीं सुधीर कोचर को दमोह कलेक्टर पद से हटाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव बनाया गया है और उन्हें एप्को का ईडी प्रभार भी सौंपा गया है। इससे साफ है कि सरकार ने तबादलों में प्रदर्शन और अनुभव को प्राथमिकता दी है।
महिला कलेक्टरों की संख्या बरकरार, कुछ बदलाव
राज्य में महिला कलेक्टरों की संख्या अब भी 17 बनी हुई है। सोनिया मीना को नर्मदापुरम कलेक्टर पद से हटाकर वित्त विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं नए चेहरों को मौका देते हुए कई जिलों में महिला अधिकारियों को कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह संकेत है कि प्रशासन में महिला नेतृत्व को बनाए रखने पर सरकार का फोकस जारी है।
आधी रात के ट्रांसफर: रणनीति या परंपरा?
मध्यप्रदेश में आधी रात को तबादलों की परंपरा नई नहीं है, लेकिन हर बार यह चर्चा जरूर छेड़ देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अचानक और गोपनीय तरीके से इसलिए लिए जाते हैं, ताकि राजनीतिक या बाहरी दबाव से बचा जा सके। वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। फिलहाल, इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने यह साफ कर दिया है कि 2027 के चुनावों से पहले सरकार प्रशासनिक स्तर पर मजबूत पकड़ बनाना चाहती है।