राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा मोड़…‘गैर-मौजूद धारा’ पर गिरफ्तारी, सोनम को ऐसे मिली जमानत…हाईकोर्ट जाने की तैयारी में राजा का परिवार

Raja Raghuvanshi murder case

राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा मोड़…‘गैर-मौजूद धारा’ पर गिरफ्तारी, सोनम को मिली जमानत

अदालत की सख्त टिप्पणी—“गिरफ्तारी प्रक्रिया ही अवैध”, जांच एजेंसियों पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल/इंदौर: चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है—और इसकी वजह पुलिस की गंभीर लापरवाही बताई जा रही है। आरोप है कि गिरफ्तारी के दस्तावेजों में हत्या की धारा का उल्लेख ही नहीं किया गया, जबकि अन्य गलत और गैर-मौजूद धाराएं दर्ज कर दी गईं। इस तकनीकी खामी के चलते अदालत ने आरोपी को राहत दे दी, जिससे पीड़ित पक्ष में भारी नाराजगी है। राजा रघुवंशी के परिवार ने इस फैसले को न्याय के साथ अन्याय करार देते हुए अब हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, केस की शुरुआती जांच में ही गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियां सामने आई थीं, लेकिन समय रहते उन्हें सुधारा नहीं गया। यही चूक अब पूरे मामले को कमजोर करती दिख रही है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में इस तरह की लापरवाही जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

कानूनी चूक से मिली राहत…सोनम रघुवंशी जमानत पर रिहा…

हाईकोर्ट जाने की तैयारी में राजा का परिवार

गिरफ्तारी में ‘मर्डर चार्ज’ ही गायब, जांच पर उठे गंभीर सवाल

चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक ऐसा कानूनी मोड़ सामने आया है, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी है। करीब 11 महीने से जेल में बंद मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत से जमानत मिल गई है। लेकिन यह राहत किसी सबूत के आधार पर नहीं, बल्कि पुलिस की गंभीर प्रक्रियात्मक चूक के कारण मिली है।

अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया, वे अस्तित्व में ही नहीं हैं। यह टिप्पणी न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है।

‘कागजों में ही गलती’: गैर-मौजूद धारा में गिरफ्तारी

कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो, निरीक्षण मेमो और केस डायरी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 403(1) का उल्लेख किया था—जबकि ऐसी कोई धारा कानून में मौजूद ही नहीं है। इतना ही नहीं, जिस हत्या के आरोप में गिरफ्तारी दिखाई गई, उसकी धारा (BNS 103(1)) भी उन दस्तावेजों में दर्ज नहीं थी, जो आरोपी को गिरफ्तारी के समय दिखाए गए। अदालत ने इसे महज ‘क्लेरिकल एरर’ मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह आरोपी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

“कारण ही नहीं बताए गए तो बचाव कैसे होगा?”

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि किसी भी आरोपी को यह बताना अनिवार्य है कि उसे किस अपराध और किस धारा में गिरफ्तार किया जा रहा है। लेकिन इस मामले में यही मूल प्रक्रिया पूरी तरह नजरअंदाज हुई। कोर्ट ने टिप्पणी की—अगर आरोपी को गिरफ्तारी के वैध कारण ही नहीं बताए गए, तो वह अपने बचाव का अधिकार कैसे इस्तेमाल करेगा? इसी आधार पर अदालत ने पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया को ही अवैध करार दिया।

वकील तक की सुविधा नहीं मिली

मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया। अदालत के अनुसार ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिससे साबित हो सके कि गिरफ्तारी के बाद सोनम को वकील की सुविधा दी गई थी। पहली बार जब उन्हें गाजीपुर की अदालत में पेश किया गया, तब भी यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें कानूनी सलाह का अवसर मिला या नहीं। इसे भी अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया की बड़ी खामी माना।

जमानत पर सख्त शर्तें लागू

हालांकि अदालत ने जमानत दे दी है, लेकिन इसके साथ कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं। सोनम रघुवंशी बिना अदालत की अनुमति के शिलांग से बाहर नहीं जा सकेंगी। यह शर्त इसलिए अहम है क्योंकि मामला अभी जांच के अधीन है।

परिवार में आक्रोश, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

जमानत के फैसले के बाद मृतक के परिवार में गहरा आक्रोश है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे “न्याय के साथ अन्याय” बताते हुए कहा कि पुलिस की लापरवाही का फायदा आरोपी को मिला है। परिवार अब हाईकोर्ट में जमानत रद्द कराने की तैयारी कर रहा है।

मां का दर्द: “न्याय पर भरोसा टूटा”

राजा की मां उमा रघुवंशी ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका कानून पर से भरोसा उठ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में “पैसों का खेल” हुआ है और न्याय प्रभावित हुआ है। वहीं पिता अशोक रघुवंशी और भाई सचिन रघुवंशी ने भी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए। सचिन ने कहा, “सुना था कानून अंधा होता है, अब यकीन हो गया।”

बता दें इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों मेघालय हनीमून पर गए। 23 मई 2025 को राजा अचानक लापता हो गए। कई दिनों की तलाश के बाद 2 जून 2025 को उनका शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) में एक गहरी खाई से बरामद हुआ। इसके बाद 8 जून को सोनम ने गाजीपुर में आत्मसमर्पण किया। पुलिस ने अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर विशेष जांच टीम गठित की थी। राजा रघुवंशी हत्याकांड में सामने आई यह कानूनी चूक बताती है कि जांच में छोटी सी लापरवाही भी बड़े केस की दिशा बदल सकती है। अब नजर इस बात पर है कि क्या हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती मिलने के बाद कहानी फिर पलटेगी, या यह मामला यहीं नया मोड़ ले चुका है।

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