उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मातृ एवं शिशु पोषण के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की ‘टेक होम राशन’ योजना ने न केवल कुपोषण के खिलाफ जंग को तेज किया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा दी है। भारत सरकार की ‘सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0’ गाइडलाइन को इतने बड़े पैमाने पर लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है।
1. 1.56 करोड़ लाभार्थियों को पोषण: देश का अग्रणी राज्य बना उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार की ‘टेक होम राशन’ योजना वर्तमान में राज्य के 1.56 करोड़ लाभार्थियों के लिए एक सुरक्षा कवच बन चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस दूरदर्शी योजना के तहत हर महीने छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं और गंभीर रूप से अतिकुपोषित बच्चों तक उच्च गुणवत्ता वाला पुष्टाहार सीधे पहुँचाया जा रहा है। इतने व्यापक स्तर पर पोषण अभियान को धरातल पर उतारकर यूपी देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार में सबसे आगे निकल गया है।
2. डिजिटल निगरानी और हाईटेक ट्रैकिंग: भ्रष्टाचार और लीकेज पर पूर्ण विराम
पुष्टाहार वितरण प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए योगी सरकार ने पूरी सप्लाई चेन को आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया है:
- जीपीएस और क्यूआर कोड: राशन के हर पैकेट की आवाजाही पर नजर रखने के लिए जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग और क्यूआर (QR) कोड प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
- ओटीपी आधारित सत्यापन: आंगनवाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार का वितरण केवल तभी होता है जब लाभार्थी के पंजीकृत मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) का सत्यापन हो जाता है। इस डिजिटल व्यवस्था से राशन सीधे सही हकदार तक पहुँच रहा है और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है।
3. एनएफएचएस (NFHS) के आंकड़े गवाह: बच्चों में स्टंटिंग और कुपोषण में ऐतिहासिक कमी
बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, इस वैज्ञानिक और केंद्रित नीति का जमीनी असर अब राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में साफ दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक:
- राज्य में बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) की दर 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई है।
- इसके साथ ही बच्चों में अल्पवजन (कम वजन) और दुबलेपन जैसी गंभीर समस्याओं में भी ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है।
4. आयु के अनुसार विशेष ‘पोषण उत्पाद’: अलग-अलग रेसिपी से तैयार पुष्टाहार
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लाभार्थियों की शारीरिक और जैविक आवश्यकताओं के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से अनुपूरक पुष्टाहार तैयार किए जा रहे हैं:
- शिशुओं और बच्चों के लिए: ‘शिशु अमृत’, ‘शिशु आहार’, ‘बाल पुष्टिकर’, ‘आरोग्य पोषण’ और ‘बाल संजीवनी’ जैसे ऊर्जा और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर विशेष उत्पाद दिए जा रहे हैं।
- माताओं के लिए: गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के संतुलित स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखकर विशेष ‘संपूर्ण मातृ आहार’ तैयार किया जा रहा है।
5. महिला स्वयं सहायता समूहों को कमान: पोषण के साथ ग्रामीण आजीविका को संबल
यह योजना केवल स्वास्थ्य में सुधार ही नहीं कर रही, बल्कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया बन गई है।
टेक होम राशन के निर्माण, पैकेजिंग और आपूर्ति की पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपी गई है। वर्तमान में प्रदेश की 4,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं इन हाईटेक उत्पादन इकाइयों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। तकनीक, पोषण और सामाजिक समावेशन का यह अनूठा संगम यूपी को ‘सुपोषित भारत’ के संकल्प में एक रोल मॉडल बनाता है।