इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गहराता जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में एक और जहाज पर हमले का दावा सामने आया है, जबकि कुवैत, कतर, यूएई और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमलों की खबरों से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।
होर्मुज में बढ़ा महासंकट
US-ईरान जंग तेज होर्मुज में जहाज पर हमला
खाड़ी में अमेरिकी ठिकाने फिर बने निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में “नियमों का उल्लंघन करने वाले” एक और जहाज को रोकने के लिए कार्रवाई की है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। IRGC ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसका जवाब और अधिक कड़ा होगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया है कि इस सप्ताह ईरान के खिलाफ तीसरे दौर की सैन्य कार्रवाई पूरी की गई। अमेरिकी दावे के मुताबिक मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक ठिकानों, गोला-बारूद भंडार और संचार नेटवर्क सहित बड़ी संख्या में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इसी बीच कतर स्थित अमेरिकी अल उदीद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का भी दावा किया गया है। ईरान का कहना है कि उसने एयरबेस के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया, जबकि कतर के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइलों को रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया और किसी बड़े नुकसान से बचाव हुआ।
ईरान ने दोहराया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण कायम है और बिना समन्वय के गुजरने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि उसने हाल के दिनों में सैकड़ों व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है।
लगातार बढ़ते सैन्य हमलों, जवाबी कार्रवाइयों और कड़े बयानों के बीच मध्य-पूर्व की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।