गरीब परिवारों के बजट पर नई चुनौती
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने देश के करोड़ों गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति दिलाकर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन अब इस योजना में किए गए नए बदलाव ने लाभार्थियों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को सालाना 9 से घटाकर 4 कर दिया है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो अपनी रसोई के लिए पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं।
क्या होगा उन लोगों का जिन्होंने पहले ही कई सिलेंडर ले लिए?
सबसे बड़ा सवाल उन उपभोक्ताओं के सामने है जिन्होंने वर्ष के शुरुआती महीनों में कई सिलेंडर ले लिए हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी की गणना वित्तीय वर्ष के आधार पर की जाएगी। भारत में वित्तीय वर्ष अप्रैल से मार्च तक माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जनवरी, फरवरी और मार्च में लिए गए सिलेंडर नई सीमा में शामिल नहीं होंगे। यदि किसी लाभार्थी ने अप्रैल और मई में दो सब्सिडी वाले सिलेंडर लिए हैं तो वह मार्च 2027 तक दो और सब्सिडी वाले सिलेंडर प्राप्त कर सकेगा। चार सिलेंडर की सीमा पूरी होने के बाद अगले सिलेंडरों पर पूरी कीमत चुकानी होगी।
10 करोड़ से अधिक परिवार होंगे प्रभावित
केंद्र सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या 10 करोड़ से अधिक है। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्वच्छ ईंधन योजनाओं में से एक मानी जाती है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को इसका सबसे अधिक लाभ मिला है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद करोड़ों परिवारों के वार्षिक रसोई बजट में वृद्धि होने की संभावना है। पहले जहां लाभार्थियों को अधिक सब्सिडी का फायदा मिलता था, वहीं अब सालभर में मिलने वाली कुल सब्सिडी की राशि काफी कम हो जाएगी। इससे विशेष रूप से निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव आवश्यक हो गया था। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। बताया जा रहा है कि एलपीजी की आपूर्ति लागत में वृद्धि हुई है और तेल कंपनियां प्रति सिलेंडर नुकसान उठा रही हैं। ऐसे में सरकार ने सब्सिडी के दायरे को सीमित कर वित्तीय बोझ कम करने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि पात्र लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती रहेगी, लेकिन इसकी सीमा अब चार सिलेंडर तक ही होगी।
उज्ज्वला योजना का भविष्य और उपभोक्ताओं की उम्मीदें
उज्ज्वला योजना को देश में सामाजिक परिवर्तन की बड़ी योजनाओं में गिना जाता है। इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए योजना में किसी भी बदलाव का असर सीधे करोड़ों परिवारों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को वित्तीय संतुलन और गरीब परिवारों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। यदि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आती है तो भविष्य में राहत संबंधी नए फैसले भी लिए जा सकते हैं। फिलहाल लाभार्थियों को अपने गैस उपयोग की बेहतर योजना बनानी होगी ताकि उपलब्ध सब्सिडी का अधिकतम लाभ मिल सके।
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 किए जाने का निर्णय करोड़ों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। जहां सरकार इसे बढ़ती लागत और वित्तीय दबाव से जोड़ रही है, वहीं लाभार्थी इसे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव कितना व्यापक होता है और सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाती है।