मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ‘जन विश्वास अभियान’ अब केवल शिकायतें सुनने और अधिकारियों पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं दिख रहा है। 7 अगस्त से शुरू हुआ यह अभियान सरकार को सीधे जनता के बीच ले जाने की कोशिश के साथ-साथ शिकायत, समाधान, जवाबदेही और विकास—इन चार स्तरों पर काम करता नजर आ रहा है। हर शुक्रवार मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और अधिकारी फील्ड में पहुंचकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि सरकार अब सिर्फ दफ्तर में बैठकर फैसले लेने के बजाय मौके पर पहुंचकर समस्याओं की वास्तविकता देखना चाहती है।
कार्रवाई से शुरू हुआ भरोसे का संदेश
जन विश्वास अभियान की शुरुआत छिंदवाड़ा से हुई और पहले ही दिन तीन अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। प्रसूति सहायता में गड़बड़ी के मामले में CMHO डॉ. नरेश गुन्नाड़े तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े मामले में तहसीलदार सुनैना ब्रम्हे और पटवारी सिद्धांत साहू पर कार्रवाई हुई। इसके अलावा कुछ अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोकने और कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश भी दिए गए।
यहां महत्वपूर्ण बात सिर्फ निलंबन नहीं थी। गलत पटवारी प्रतिवेदन के कारण किसान सम्मान निधि से वंचित महिला को मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता से एक वर्ष की सहायता देने का निर्देश देकर यह संकेत दिया गया कि सरकार की प्राथमिकता केवल दोषी को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ित को राहत पहुंचाना भी है।
बड़वानी में जवाबदेही का दायरा बढ़ा
14 अगस्त को बड़वानी में अभियान के दौरान कार्रवाई और व्यापक हुई। नामांतरण में करीब छह वर्ष की देरी के मामले में तत्कालीन तहसीलदार एवं वर्तमान डिप्टी कलेक्टर आशा परमार और दो पटवारियों मांगीलाल नरगांवे तथा ललित बोरसे के निलंबन के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना की किश्त में देरी के मामले में तत्कालीन CMO मायाराम सोलंकी, जगदीश धाकड़ और सहायक यंत्री राजू डावर पर निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन इंदौर एसके सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। पानसेमल में संबल योजना के अंतर्गत अंत्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता का मामला अप्रैल 2019 से लंबित था। यहां तत्कालीन जनपद पंचायत CEO सौरभ सिंह ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। जांच में ऐसे 16 मामले सामने आने की बात भी सामने आई। इससे अभियान का एक स्पष्ट प्रशासनिक संदेश उभरता है—सरकारी योजनाओं में वर्षों तक फाइल दबाकर रखना अब स्वीकार्य नहीं होगा।
टीकमगढ़ में भी सख्त संदेश
21 अगस्त को टीकमगढ़ में सहकारी बैंक की मवई शाखा से जुड़ी शिकायत में मृतक हितग्राही की राशि नॉमिनी के खाते में ट्रांसफर नहीं किए जाने का मामला सामने आया। मुख्यमंत्री ने लापरवाही पाए जाने पर जिला पंजीयक सहकारिता एसके कौशिक को निलंबित करने के निर्देश दिए। बाल आशीर्वाद योजना के भुगतान में देरी और पशु बीमा राशि के लंबे समय से लंबित मामलों में भी जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए। यानी अभियान के जरिए सरकार यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि CM हेल्पलाइन हो या सरकारी योजना, शिकायत का मतलब सिर्फ नंबर दर्ज होना नहीं, बल्कि समयबद्ध समाधान होना है।
सिर्फ निलंबन नहीं, विकास की नई तस्वीर
अगर जन विश्वास अभियान को केवल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के नजरिए से देखा जाए तो तस्वीर अधूरी रह जाएगी। इसकी दूसरी महत्वपूर्ण धुरी विकास और स्थानीय संभावनाओं को गति देना है। टीकमगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाकाल लोक की तर्ज पर ‘कुंडेश्वर लोक’ विकसित करने की घोषणा की। पर्यटन विभाग को इसकी योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं माना जा सकता, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, छोटे कारोबार, परिवहन, होटल और रोजगार के अवसरों को गति मिलने की संभावना है। इसी तरह टीकमगढ़ के पीतल शिल्प और स्थानीय हुनर को बाजार उपलब्ध कराने तथा युवाओं के लिए उद्योग और कौशल विकास के जरिए रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया गया। यानी शिकायतों के समाधान के साथ सरकार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एजेंडा भी सामने रख रही है।
गौशालाओं के संदर्भ में प्रति गौवंश प्रतिदिन अनुदान बढ़ाकर 40 रुपये किए जाने और वर्ष 2026-27 के लिए गौशाला अनुदान हेतु 620.50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान का उल्लेख भी इसी व्यापक नीति का हिस्सा है। इससे संकेत मिलता है कि अभियान केवल प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भी शासन के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है।
‘शिकायत-संवाद-समाधान’ से ‘विश्वास’ तक
जन विश्वास अभियान का असली परीक्षण आने वाले समय में होगा। कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई करना तत्काल प्रभाव पैदा करता है, लेकिन स्थायी बदलाव तभी माना जाएगा जब ऐसी शिकायतें दोबारा सामने न आएं और निचले स्तर का प्रशासन समय पर काम करने लगे। फिलहाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जवाबदेही और प्रोत्साहन दोनों को साथ रखने का संकेत दिया है। लापरवाही पर कार्रवाई होगी, जबकि बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। यही संतुलन अभियान को सिर्फ ‘एक्शन ड्राइव’ से अलग करता है। कुल मिलाकर जन विश्वास अभियान का मॉडल ‘फील्ड में सरकार, मौके पर समाधान, लापरवाही पर कार्रवाई और साथ-साथ विकास’ के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री की पहल का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जनता के बीच पहुंचने वाली सरकार सीधे अपनी योजनाओं का असर देख सकती है और अधिकारी भी महसूस करते हैं कि उनकी कार्यप्रणाली अब केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के अनुभव के आधार पर परखी जाएगी।
यानी जन विश्वास अभियान का लक्ष्य केवल शिकायतें खत्म करना नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच भरोसे की दूरी कम करना है। यही इस अभियान को मध्यप्रदेश में प्रशासनिक कार्यशैली के एक नए प्रयोग के रूप में स्थापित कर सकता है।





