गैस सिलेंडर महंगा, फिर भी दुनिया के कई देशों से सस्ता: पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा

Pradhanmantri Ujjwala Yojana

घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की हालिया बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश करते हुए दावा किया है कि भारत में एलपीजी अब भी दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी सस्ती है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती लागत के बावजूद सरकार उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाल रही है।

1. 29 रुपये महंगा हुआ LPG सिलेंडर, मंत्रालय ने दी सफाई
2. भारत में अब भी सबसे सस्ती रसोई गैस, सरकार का दावा
3. उज्ज्वला लाभार्थियों को मिल रही बड़ी राहत
4. पाकिस्तान, नेपाल और अमेरिका से सस्ता भारतीय LPG
5. अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच बढ़ी कीमतें, सरकार उठा रही बोझ

नई कीमतों के लागू होने के बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये हो गई है। यह पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उछाल के बाद दूसरी बड़ी वृद्धि है। मार्च में 60 रुपये और अब 29 रुपये की बढ़ोतरी के साथ कुल वृद्धि 89 रुपये तक पहुंच चुकी है।

हालांकि मंत्रालय का कहना है कि वास्तविक लागत और उपभोक्ता द्वारा चुकाई जा रही कीमत में अभी भी बड़ा अंतर है। सरकार के अनुसार एक घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत अब 1,600 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, लेकिन आम उपभोक्ता इसे 942 रुपये में प्राप्त कर रहा है। यानी शेष लागत का बड़ा हिस्सा सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वहन कर रही हैं।

मंत्रालय ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। उज्ज्वला योजना के तहत पात्र उपभोक्ताओं को साल में चार रिफिल तक प्रति सिलेंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) सहायता मिलती है। इसके बाद उनके लिए एक सिलेंडर की प्रभावी कीमत लगभग 642 रुपये रह जाती है।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में उज्ज्वला लाभार्थी जिस कीमत पर गैस सिलेंडर खरीद रहे हैं, वह कई पड़ोसी और विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। पाकिस्तान में समान मात्रा का सिलेंडर लगभग 1,046 रुपये, नेपाल में 1,207 रुपये और बांग्लादेश में करीब 1,225 रुपये के बराबर पड़ता है। श्रीलंका में यह कीमत 1,241 रुपये तक पहुंच जाती है।

विकसित देशों की बात करें तो अमेरिका में 14.2 किलोग्राम के बराबर एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 1,755 रुपये है। ऑस्ट्रेलिया में यह 1,765 रुपये और कनाडा में करीब 2,411 रुपये तक पहुंच जाती है। इन आंकड़ों के आधार पर मंत्रालय का दावा है कि भारतीय उपभोक्ता, विशेषकर उज्ज्वला योजना के लाभार्थी, वैश्विक स्तर पर अपेक्षाकृत सस्ती रसोई गैस का लाभ उठा रहे हैं।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी की कीमतें पूरी तरह बाजार आधारित नहीं हैं। भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसकी लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होने वाले सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) से प्रभावित होती है। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष या कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे गैस की लागत पर पड़ता है।

सरकार के अनुसार व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप स्वतः संशोधित होती हैं, जबकि घरेलू सिलेंडरों की कीमतों में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार हस्तक्षेप करती है। यही वजह है कि वास्तविक लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी बढ़ी हुई कीमत नहीं चुकानी पड़ती।

हालांकि गैस सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। महंगाई और घरेलू बजट पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

रसोई गैस की कीमतों को लेकर बहस के बीच इतना तय है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता का असर आने वाले समय में भी एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और उपभोक्ताओं दोनों की नजरें वैश्विक ऊर्जा बाजार की गतिविधियों पर बनी रहेंगी।

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