जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ तक: ओडीओपी ने बदली जैनुल की किस्मत
इटावा के युवा की सफलता, 10 लाख के लोन से खड़ी की टेक्सटाइल यूनिट
हर महीने 50 हजार की कमाई, 6 लोगों को दिया रोजगार
उत्तर प्रदेश में युवाओं की तस्वीर तेजी से बदल रही है। नौकरी तलाशने के बजाय अब युवा खुद रोजगार देने वाले बन रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में है एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP) योजना, जिसने छोटे शहरों में उद्यमिता को नई उड़ान दी है।
योगी सरकार की योजना बनी गेम-चेंजर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई ODOP योजना का उद्देश्य हर जिले के पारंपरिक उत्पाद को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। यह योजना अब युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें “जॉब क्रिएटर” में बदल रही है।
इटावा के जैनुल आबदीन की प्रेरक कहानी
इटावा के रामगंज निवासी जैनुल आबदीन ने इस योजना का लाभ उठाकर अपनी जिंदगी बदल दी।
- साल 2025 में जिला उद्योग केंद्र के जरिए उन्हें योजना की जानकारी मिली
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 10 लाख रुपये का लोन लिया
- इसके बाद उन्होंने फैशन और टेक्सटाइल यूनिट स्थापित की
आज उनकी यूनिट में मैक्सी और कुर्ती जैसे परिधानों का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जा रहा है।
कमाई के साथ रोजगार भी
जैनुल की मेहनत रंग लाई—
- हर महीने करीब 50,000 रुपये की आमदनी
- 4 से 6 लोगों को रोजगार
इस तरह वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने, बल्कि दूसरों के लिए भी रोज़गार का जरिया बन गए।
छोटे शहरों में बड़ा बदलाव
ODOP योजना का सबसे बड़ा असर यह है कि:
स्थानीय स्तर पर उद्योग बढ़ रहे हैं
पलायन कम हो रहा है
युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ रहा है
जैनुल आबदीन की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर है जहां युवा अब अवसर खुद बना रहे हैं। संदेश साफ है सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और मेहनत—दोनों मिलकर किसी भी सपने को हकीकत बना सकते हैं





