चीन के ऐतिहासिक शहर चिंगतचन (Jingdezhen) को विश्व स्तर पर बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि हासिल हुई है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित 48वें विश्व धरोहर सम्मेलन में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने “चिंगतचन के हाथ से बने चीनी मिट्टी के बर्तनों” को आधिकारिक रूप से विश्व विरासत सूची में शामिल करने का फैसला लिया। इस उपलब्धि के साथ चीन के विश्व विरासत स्थलों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है। सदियों से उत्कृष्ट पोर्सिलेन निर्माण के लिए प्रसिद्ध चिंगतचन को दुनिया भर में “हजार वर्षीय पोर्सिलेन कैपिटल” के नाम से जाना जाता है और अब इसकी ऐतिहासिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल गई है।
48वें विश्व धरोहर सम्मेलन के फैसले ने चिंगतचन की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक सम्मान दिलाया
दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद इस विरासत को सूची में शामिल किया गया। यह निर्णय केवल एक शहर की उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि चीन की पारंपरिक शिल्पकला और सांस्कृतिक इतिहास को वैश्विक मंच पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से चिंगतचन अपने हस्तनिर्मित चीनी मिट्टी के बर्तनों और उनकी अनूठी निर्माण तकनीक के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध रहा है।
चीन की औद्योगिक विरासत को पहली बार यूनेस्को की सूची में मिला विशेष स्थान
यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि “औद्योगिक विरासत” श्रेणी में विश्व विरासत सूची में शामिल होने वाला यह चीन का पहला प्रस्ताव है। साथ ही, पोर्सिलेन विषय से जुड़ी विरासत को भी पहली बार इस स्तर पर वैश्विक मान्यता मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्राचीन चीन की उस सांस्कृतिक और व्यापारिक विरासत को भी मजबूती देता है, जिसने सिल्क और चाय की तरह पोर्सिलेन को दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया और वैश्विक सांस्कृतिक आदान-प्रदान में अहम भूमिका निभाई।
विश्व विरासत का दर्जा मिलने से पर्यटन, शोध और सांस्कृतिक संरक्षण को मिलेगा नया विस्तार
विश्व विरासत सूची में शामिल होने के बाद चिंगतचन के संरक्षण, शोध और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह दर्जा न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को मजबूत करेगा, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों, इतिहासकारों और कला शोधकर्ताओं को भी इस प्राचीन शहर की ओर आकर्षित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल शिल्प परंपरा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





