देश में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का दायरा लगातार बढ़ रहा है। असेसमेंट ईयर 2026 के लिए अब तक 7.3 करोड़ से अधिक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं, जो पिछले वर्ष के मुकाबले नया रिकॉर्ड है। यह बढ़ती टैक्स अनुपालन संस्कृति, डिजिटल सुविधाओं और सरकार के टैक्स सिस्टम को सरल बनाने के प्रयासों का बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने इस उपलब्धि को टैक्स प्रशासन में आए बदलावों का सकारात्मक परिणाम बताया।
ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए ‘सहयोगी’ बन रहा आयकर विभाग
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि आयकर विभाग की भूमिका अब केवल कार्रवाई करने वाली एजेंसी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विभाग को ईमानदार करदाताओं के लिए एक ‘फैसिलिटेटर’ यानी सहयोगी संस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और कम मानवीय हस्तक्षेप वाला बनाना है। इसी दिशा में फेसलेस टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि करदाताओं को बिना अनावश्यक परेशानी के तेज और बेहतर सेवाएं मिल सकें।
सरकार ऑटोमेशन बढ़ाने, डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करने और टैक्स से जुड़े विवादों को कम करने पर विशेष जोर दे रही है। इससे टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक आसान और भरोसेमंद बन रही है।
चार लाख शिकायतों का समाधान, अपील निपटाने में भी बड़ी छलांग
आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपनी कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। विभाग ने 2.24 लाख टैक्स अपीलों का निपटारा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है।
इसके साथ ही विभाग ने करीब चार लाख करदाताओं की शिकायतों का समाधान किया और लगभग 95 प्रतिशत निपटान दर हासिल की। यह दर्शाता है कि विभाग केवल राजस्व संग्रह पर ही नहीं, बल्कि करदाताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायतों के तेज निपटारे और डिजिटल सेवाओं के विस्तार से टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ा है, जिसका असर रिकॉर्ड संख्या में आईटीआर दाखिल होने के रूप में दिखाई दे रहा है।
टैक्स कलेक्शन बढ़ा, नया आयकर कानून करेगा नियम आसान
राजस्व सचिव के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रॉस और नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन दोनों में लगभग 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद प्रत्यक्ष कर संग्रह में यह बढ़ोतरी सरकार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
उन्होंने नए आयकर कानून को भारत के टैक्स ढांचे में सबसे बड़े सुधारों में से एक बताया। कानून को सरल बनाने के लिए सेक्शनों की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है। इससे करदाताओं और कारोबारियों के लिए नियमों को समझना और उनका पालन करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा।
सरकार का मानना है कि सरल कानून से टैक्स विवाद कम होंगे, अनुपालन बढ़ेगा और करदाताओं का समय व लागत दोनों बचेंगे।
डिजिटल टैक्स व्यवस्था से बढ़ेगा भरोसा, अनुपालन और पारदर्शिता
सरकार अब टैक्स प्रशासन को पूरी तरह तकनीक आधारित, पारदर्शी और करदाता-केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन शिकायत निवारण, ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग और कम मानवीय हस्तक्षेप जैसे कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
7.3 करोड़ से अधिक आईटीआर दाखिल होना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह संकेत है कि देश में टैक्स अनुपालन की संस्कृति मजबूत हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, आसान प्रक्रियाएं और बेहतर सेवाएं अधिक लोगों को स्वेच्छा से टैक्स सिस्टम से जोड़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इसी तरह कानूनों को सरल बनाती रही और तकनीक आधारित सेवाओं का विस्तार करती रही, तो आने वाले वर्षों में करदाताओं की संख्या और प्रत्यक्ष कर संग्रह दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत का टैक्स सिस्टम अब तेजी से ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां पारदर्शिता, सुविधा और विश्वास तीनों को समान प्राथमिकता दी जा रही है।




