ईरान को लेकर बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।
- ईरान जंग के बीच ट्रंप-मोदी की अहम बातचीत
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी रणनीति
- मिडिल ईस्ट तनाव के बीच वैश्विक सप्लाई
- ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस, समुद्री मार्ग खुला रखने पर जोर
जानकारी के मुताबिक, यह पहली बार है जब 28 फरवरी को ईरान पर हुए इजरायल और अमेरिकी हमलों के बाद दोनों नेताओं के बीच सीधे तौर पर संवाद हुआ है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बातचीत के दौरान मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस वार्ता का सबसे अहम मुद्दा रहा Strait of Hormuz, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। दोनों नेताओं ने इस जलडमरूमध्य को हर हाल में खुला बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस पृष्ठभूमि में पीएम मोदी से उनकी बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संसद में भी यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि नागरिक जहाजों, व्यापारिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आवागमन को सुरक्षित रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर असर पड़ रहा है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। तेल और गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz को खुला रखना सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक प्राथमिकता है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर बड़े देशों के बीच लगातार संवाद हो रहा है।
ट्रंप और मोदी के बीच हुई यह बातचीत इस बात का संकेत है कि दोनों देश न केवल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, बल्कि समाधान की दिशा में भी सक्रिय हैं। भारत की भूमिका यहां एक संतुलित और जिम्मेदार शक्ति के रूप में सामने आ रही है, जो शांति और स्थिरता की वकालत करता है। ईरान संकट के बीच ट्रंप और मोदी की यह बातचीत वैश्विक कूटनीति में एक अहम कदम मानी जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर बना सहमति का यह संदेश दुनिया के लिए राहत भरा हो सकता है। अब देखना होगा कि इस संवाद का जमीन पर कितना असर पड़ता है और क्या इससे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम किया जा सकेगा।