तीन घंटे की पूछताछ के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। मामले में मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से लंबी पूछताछ किए जाने के बाद जांच एजेंसियों का फोकस केवल चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और सुरक्षा तंत्र की भी गहन पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था, कैश काउंटिंग सिस्टम, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और ट्रस्ट के संचालन से जुड़े कई अहम सवाल पूछे। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने यह जानने का प्रयास किया कि मंदिर में चढ़ावे की निगरानी किस प्रकार होती थी, जिम्मेदारियां किसके पास थीं और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं ऐसी खामियां तो नहीं थीं जिनका फायदा उठाकर कथित चोरी को अंजाम दिया गया।
हालांकि अभी तक किसी भी जांच एजेंसी ने पूछताछ के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए हैं और न ही चंपत राय के खिलाफ किसी प्रकार का आरोप तय किया गया है। मामले की जांच जारी है।
कैश काउंटिंग सिस्टम और CCTV व्यवस्था पर उठे सवाल
जांच में सबसे अधिक ध्यान उस प्रक्रिया पर केंद्रित है जिसके तहत श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया दान एकत्र किया जाता था। जांच अधिकारियों के सामने यह सवाल भी है कि यदि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे तो कथित चोरी बार-बार कैसे होती रही।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि आरोपियों को कैमरों की लोकेशन और निगरानी व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी कारण वे ऐसे तरीके अपनाते थे जिससे कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। जांच एजेंसियां अब सीसीटीवी फुटेज, कैश काउंटिंग के रिकॉर्ड और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि यह भी जांच का विषय है कि कहीं निगरानी व्यवस्था में तकनीकी या मानवीय लापरवाही तो नहीं रही, जिससे कथित अनियमितताओं को लंबे समय तक रोका नहीं जा सका।
नियुक्तियों में पक्षपात के आरोप भी जांच के दायरे में
चढ़ावा चोरी की जांच के साथ-साथ मंदिर परिसर में कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि जिन कर्मचारियों को कैश काउंटिंग और सुरक्षा जैसी संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उनकी नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थी या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति में परिचितों और रिश्तेदारों को प्राथमिकता दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इसी आधार पर यह भी जांच की जा रही है कि क्या नियुक्तियों में पारदर्शिता बरती गई थी और क्या सभी कर्मचारियों का आवश्यक सत्यापन कराया गया था।
हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों, नियुक्ति रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयान दर्ज कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
क्या संगठित तरीके से हुई चोरी? जांच एजेंसियां तलाश रहीं जवाब
मामले की जांच अब इस दिशा में भी बढ़ रही है कि क्या कथित चोरी किसी एक व्यक्ति की करतूत थी या फिर इसमें कई लोगों की भूमिका रही। सूत्रों के अनुसार, जांच में यह संभावना भी देखी जा रही है कि यदि कई लोग इसमें शामिल थे तो उनकी भूमिकाएं क्या थीं और कथित रकम का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।
जांच अधिकारी बैंक रिकॉर्ड, कैश काउंटिंग रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित कर्मचारियों के बयानों का आपस में मिलान कर रहे हैं। इस पूरे मामले में अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से किसी भी बड़े निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए सभी दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
आस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता की बढ़ी मांग
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े आरोप सामने आने के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी तेज हो गई है। धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि मंदिरों में दान प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह तकनीक आधारित और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में डिजिटल रिकॉर्डिंग, मजबूत सीसीटीवी निगरानी, नियमित ऑडिट और स्वतंत्र निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं ऐसी घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित चोरी कैसे हुई, इसमें किसकी क्या भूमिका थी और क्या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता हुई। तब तक इस मामले में सामने आ रहे अधिकांश दावे जांच के दायरे में हैं और उनकी पुष्टि होना अभी बाकी है।