योग सिर्फ़ शारीरिक कसरत का एक तरीका नहीं है। यह भारत के प्राचीन ज्ञान पर आधारित एक समग्र अभ्यास है जो मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक सेहत को बढ़ावा देता है और अब पूरी दुनिया में इसका अभ्यास किया जाता है। इसकी व्यापक लोकप्रियता को देखते हुए, भारत ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र में ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ (IDY) का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को ज़बरदस्त समर्थन मिला और 21 जून को आधिकारिक तौर पर ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित किया गया।
इस साल, भारत 21 जून को Yoga for Healthy Ageing की थीम के तहत 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाएगा। योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया जाएगा, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समारोह का नेतृत्व करेंगे।
देशभर में आयुष मंत्रालय करेंगा कार्यक्रम
आयुष मंत्रालय ने देश भर में एक साथ योग कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण 12 जगहों की पहचान की है। इस पहल का मकसद भारत की विरासत और सेहत से जुड़ी परंपराओं को एक साथ लाना है, साथ ही स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण को बढ़ावा देना है।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा, “जिस तरह ये स्मारक सदियों से कायम हैं, उसी तरह योग भी ऐसी पद्धतियां देता आ रहा है जो पीढ़ियों तक शारीरिक ऊर्जा, मानसिक मजबूती और स्वस्थ बुढ़ापे में मदद करती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मुख्य कार्यक्रम IDY 2026 के राष्ट्रीय समारोह के साथ प्रधानमंत्री की मौजूदगी में आयोजित किए जाएंगे, जिससे एक अनोखा राष्ट्रीय अनुभव बनेगा और अलग-अलग राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों के नागरिक आपस में जुड़ सकेंगे।
21 जून को कहां कहां होगा योगा
योग दिवस 2026 के लिए चुनी गई खास जगहों की सूची इस प्रकार है:
दिल्ली में लाल किला
हरिद्वार में हर की पौड़ी
ओडिशा में कोणार्क सूर्य मंदिर
कर्नाटक में हम्पी के स्मारकों का समूह
लद्दाख में लेह पैलेस
तमिलनाडु में महाबलीपुरम का शोर मंदिर
उत्तर प्रदेश में सारनाथ
असम में कंचारी किला
हैदराबाद में चारमीनार का इलाका
मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया
बिहार में नालंदा महाविहार
अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट
चुनी गई जगहों के महत्व के बारे में बताते हुए जाधव ने कहा कि हर जगह देश की विविध सांस्कृतिक यात्रा को दर्शाती है। जहां लाल किला, चारमीनार, गेटवे ऑफ इंडिया और लेह पैलेस जैसी जगहें भारत के ऐतिहासिक विकास के महत्वपूर्ण अध्यायों को दिखाती हैं, वहीं कोणार्क सूर्य मंदिर और महाबलीपुरम का शोर मंदिर देश की वास्तुकला और कलात्मक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करते हैं।
सारनाथ और नालंदा भारत की शिक्षा और आध्यात्मिकता की सदियों पुरानी परंपराओं को उजागर करते हैं, जबकि हर की पौड़ी और साबरमती रिवरफ्रंट ऐसी जगहों का प्रतिनिधित्व करते हैं जहां आध्यात्मिकता और सामुदायिक जीवन लगातार फल-फूल रहे हैं।





