दिवाली की मिठास पर महंगाई की मार, चीनी ने बिगाड़ा त्योहार का बजट

Inflation hits the sweetness of Diwali sugar upsets the festive budget

दीपावली का त्योहार आते ही बाजार में रौनक बढ़ने लगती है। मिठाइयों की दुकानों पर भीड़, घरों में पकवानों की तैयारी, उपहारों की खरीदारी और बाजार में बढ़ती ग्राहकी। लेकिन इस बार त्योहार की तैयारियों के बीच महंगाई ने आम परिवारों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। दीपावली से पहले चीनी की कीमतों में उछाल ने मिठास के इस त्योहार का खर्च बढ़ा दिया है। सवाल सिर्फ चीनी महंगी होने का नहीं है, बल्कि उस पूरे घरेलू बजट का है, जिस पर त्योहार के दौरान एक साथ कई खर्चों का बोझ पड़ता है।

बाजार में चीनी के दाम में कितनी तेजी?

महाराष्ट्र के पुणे में पिछले 10 दिनों के दौरान चीनी के खुदरा भाव में 5 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पुणे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के मुताबिक, थोक बाजार में चीनी की कीमत 52 रुपये से बढ़कर 54 रुपये प्रति किलो हो गई है। वहीं, खुदरा बाजार में इसका भाव 54 रुपये से उछलकर 59 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। पहले जहां पांच किलो चीनी खरीदने के लिए 270 रुपये खर्च करने पड़ते थे, वहीं अब इतनी ही चीनी के लिए 295 रुपये देने पड़ रहे हैं। यानी एक ही खरीदारी पर 25 रुपये का अतिरिक्त खर्च।

यह बढ़ोतरी भले ही किसी एक परिवार के लिए बहुत बड़ी न लगे, लेकिन त्योहार के दौरान जब दूध, घी, तेल, सूखे मेवे, मिठाइयों और दूसरी जरूरी वस्तुओं की खरीदारी भी करनी हो, तो छोटी-छोटी बढ़ोतरी मिलकर बजट पर बड़ा असर डाल सकती हैं।

दीपावली और बाजार का गणित

दीपावली के दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। घरों में लड्डू, बर्फी, गुलाब जामुन और दूसरी मिठाइयां बनाने की तैयारी होती है। मिठाई की दुकानों, हलवाइयों और खाद्य कारोबार से जुड़े व्यवसायों को भी अधिक मात्रा में चीनी की जरूरत पड़ती है।

मांग में इसी मौसमी तेजी के बीच कीमतों का बढ़ना बाजार के लिए अहम संकेत है। चीनी विक्रेताओं के मुताबिक, त्योहार के दौरान खुदरा भाव 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, यह संभावित कीमत है, कोई निश्चित भाव नहीं।

अगर ऐसा होता है, तो चीनी की खरीदारी पर खर्च और बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई बनाने वाले कारोबारियों के सामने भी लागत का सवाल होगा। उन्हें तय करना होगा कि बढ़ी हुई लागत खुद वहन करें, मिठाइयों के दाम बढ़ाएं या मुनाफे में कटौती करें।

आखिर क्यों महंगी हो रही है चीनी?

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे केवल दीपावली की बढ़ती मांग जिम्मेदार नहीं है। इसके पीछे उत्पादन लागत और गन्ने से चीनी निकलने की दर जैसे कारक भी बताए जा रहे हैं।

चीनी मिलों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कम कीमत पर चीनी बेचना मुश्किल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, मिलों से चीनी की बिक्री करीब 50 रुपये प्रति किलो के भाव पर हो रही है, जबकि पिछले साल दीपावली के आसपास इसकी कीमत लगभग 39 रुपये प्रति किलो बताई गई थी।

इसके अलावा महाराष्ट्र में मौजूदा पेराई सत्र के दौरान चीनी की रिकवरी दर 10 प्रतिशत से नीचे बताई जा रही है। रिकवरी दर का मतलब है कि एक निश्चित मात्रा में गन्ने से कितनी चीनी प्राप्त होती है। यदि गन्ने से चीनी कम निकलती है, तो समान मात्रा में चीनी तैयार करने के लिए अधिक गन्ने की जरूरत पड़ सकती है। इससे उत्पादन की लागत पर दबाव बढ़ता है।

यानी बाजार में कीमतों का समीकरण केवल मांग और आपूर्ति तक सीमित नहीं है। उत्पादन की लागत, गन्ने की गुणवत्ता, रिकवरी दर और त्योहारों के दौरान बढ़ती खपत भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

क्या दीपावली पर चीनी की किल्लत होगी?

कीमतें बढ़ने के बीच उपभोक्ताओं के सामने दूसरा सवाल उपलब्धता का है। क्या त्योहार के दौरान चीनी की कमी भी हो सकती है?

महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त संजय कोल्टे के मुताबिक, राज्य में नौ लाख टन से अधिक चीनी का स्टॉक मौजूद है। साथ ही चीनी मिलों में गन्ने की पेराई भी शुरू हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल त्योहार के दौरान आपूर्ति में कमी की आशंका नहीं है।

यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है। हालांकि, बाजार में पर्याप्त स्टॉक होने का अर्थ यह नहीं है कि खुदरा कीमतें अपने आप कम हो जाएंगी। कीमतों में राहत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मिलों से आपूर्ति किस भाव पर होती है, बाजार में मांग कितनी रहती है और खुदरा विक्रेता किस कीमत पर बिक्री करते हैं।

त्योहार की खुशियों और महंगाई के बीच संतुलन

दीपावली सिर्फ खरीदारी का अवसर नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और आपसी मिठास का त्योहार है। ऐसे में जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर लोगों के खर्च करने के तरीके पर भी पड़ सकता है। कुछ परिवार मिठाइयों की मात्रा कम कर सकते हैं, कुछ घर पर मिठाई बनाना पसंद कर सकते हैं, तो कुछ लोग खरीदारी का बजट पहले से तय कर सकते हैं।

बाजार के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण है। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने से कारोबार को गति मिलती है, लेकिन यदि जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष यही है कि इस बार दीपावली पर चीनी की उपलब्धता को लेकर फिलहाल राहत के संकेत हैं, लेकिन कीमतों में तेजी ने घरेलू बजट की चिंता बढ़ा दी है। असली सवाल यह है कि पर्याप्त स्टॉक और नई पेराई शुरू होने का लाभ उपभोक्ताओं तक कीमतों में स्थिरता के रूप में पहुंचता है या नहीं। क्योंकि त्योहार की असली मिठास तभी कायम रहेगी, जब बाजार की रौनक के साथ आम आदमी की जेब का संतुलन भी बना रहे।

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