भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार…: ‘मुंगड़ा’ गीत से पहचान, मंगेशकर परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने वाली गायिका को मिलेगा बड़ा सम्मान

Mungda and has carried forward the legacy of the Mangeshkar family is set to receive a major honor

भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाली वरिष्ठ पार्श्व गायिका उषा मंगेशकर को पहला भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा। असम सरकार ने भारतीय संगीत में उनके योगदान और भूपेन हजारिका की रचनाओं से उनके जुड़ाव को देखते हुए यह घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भूपेन हजारिका की जन्मशती के वर्षभर चले समारोह के समापन कार्यक्रम में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।

कौन हैं उषा मंगेशकर?

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उषा मंगेशकर भारतीय पार्श्व गायन की जानी-मानी आवाज हैं। उनका जन्म 15 दिसंबर 1935 को संगीत से जुड़े मंगेशकर परिवार में हुआ। वह महान गायिका लता मंगेशकर और आशा भोसले की छोटी बहन हैं।

परिवार की संगीत विरासत के बीच उषा मंगेशकर ने अपनी गायकी और अलग अंदाज से पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी, मराठी सहित कई भाषाओं की फिल्मों के लिए गीत गाए और भक्ति संगीत में भी योगदान दिया।

‘मुंगड़ा’ गीत से मिली खास पहचान

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उषा मंगेशकर के सबसे लोकप्रिय गीतों में 1978 की फिल्म इंकार का ‘मुंगड़ा’ शामिल है। राजेश रोशन के संगीत से सजा यह गीत आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है। इसके अलावा मराठी गीतों और भक्ति रचनाओं में उनके योगदान ने उनकी बहुआयामी प्रतिभा को सामने रखा।

भूपेन हजारिका के नाम पर सम्मान क्यों खास?

भूपेन हजारिका केवल गायक और संगीतकार ही नहीं, बल्कि कवि, गीतकार और फिल्मकार भी थे। उनकी रचनाओं में असम की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाएं प्रमुखता से दिखाई देती हैं। उनके नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार शुरू करना उनकी संगीत विरासत को देशव्यापी पहचान देने की पहल है। उषा मंगेशकर को पहला पुरस्कार दिए जाने का महत्व इसलिए भी है कि यह सम्मान भारतीय संगीत की उस पीढ़ी के योगदान को रेखांकित करता है, जिसने क्षेत्रीय भाषाओं और हिंदी सिनेमा के संगीत को व्यापक श्रोताओं तक पहुंचाया।

बड़ा सवाल: संगीत विरासत को नई पीढ़ी तक कैसे पहुंचाया जाए?

यह सम्मान सिर्फ एक वरिष्ठ गायिका की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को याद करने का अवसर भी है। भूपेन हजारिका और उषा मंगेशकर जैसे कलाकारों का काम बताता है कि संगीत भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से आगे जाकर लोगों को जोड़ सकता है। उषा मंगेशकर को मिलने वाला पहला भूपेन हजारिका राष्ट्रीय पुरस्कार भारतीय संगीत में उनके लंबे योगदान और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का प्रतीक होगा।

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