भारतीय एक्यूपंक्चर चिकित्सक प्रतिनिधिमंडल ने चीन का दौरा किया

28 सितंबर को कोलकाता में चीनी महावाणिज्यदूत श्य्वी वेई ने भारतीय एक्यूपंक्चर चिकित्सकों के
एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक
आदान-प्रदान तथा एक्यूपंक्चर चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श
किया।

बता दें कि कोलकाता स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास के निमंत्रण पर पांच सदस्यीय भारतीय
एक्यूपंक्चर चिकित्सक प्रतिनिधिमंडल ने 14 से 21 सितंबर तक चीन के नानचिंग, शिच्याच्वांग,
यानान और शीआन का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय पारंपरिक चीनी चिकित्सा
(TCM) कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों के साथ गहन आदान-प्रदान किया।

मुलाकात के दौरान श्य्वी वेई ने प्रतिनिधिमंडल को चीन की सफल यात्रा के लिए बधाई दी। उन्होंने
कहा कि हाल के दिनों में चीन और भारत के नेताओं ने साझेदार बनने को लेकर महत्वपूर्ण सहमति
व्यक्त की है। पिछले कुछ वर्षों में चीन-भारत संबंधों में लगातार सुधार और विकास हुआ है और दोनों
देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान भी गहरा हुआ है।

उन्होंने कहा कि चीन-भारत मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान का एक जीवंत उदाहरण डॉ. बिजॉय कुमार बसु हैं,
जो चीन के जापानी आक्रमण विरोधी युद्ध में चीन की सहायता करने वाली भारतीय चिकित्सा टीम
के सदस्य थे। भारत लौटने के बाद उन्होंने देश में एक्यूपंक्चर को बढ़ावा देने के लिए खुद को
समर्पित कर दिया और दोनों देशों के बीच चिकित्सा क्षेत्र में आदान-प्रदान तथा लोगों के बीच मित्रता
को मजबूत करने में सकारात्मक योगदान दिया।

श्य्वी वेई ने उम्मीद जताई कि प्रतिनिधिमंडल अपनी चीन यात्रा के अनुभवों और उपलब्धियों को
आगे बढ़ाएगा, चीन और भारत के बीच पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आदान-प्रदान और सहयोग को
और गहरा करेगा, भारत में एक्यूपंक्चर के प्रसार और विकास को बढ़ावा देगा तथा दोनों देशों के
लोगों के बीच मित्रता को और मजबूत करेगा।

वहीं, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष और डॉ. बिजॉय कुमार बसु के शिष्य देबाशीष बक्शी ने कहा
कि प्रतिनिधिमंडल ने चीन यात्रा के दौरान पारंपरिक चीनी चिकित्सा और आधुनिक प्रौद्योगिकी के
एकीकरण से जुड़ी नवीनतम उपलब्धियों को करीब से देखा और समझा। उन्होंने चीन की आर्थिक

और सामाजिक विकास की उपलब्धियों की सराहना की।
साथ ही, उन्होंने भारत में एक्यूपंक्चर के विकास को बढ़ावा देने, पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में दोनों
देशों के बीच आदान-प्रदान को मजबूत करने और चीन तथा भारत के लोगों के बीच मित्रता को बढ़ावा
देने में योगदान देने की इच्छा जताई।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

 

 

 

 

 

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