भारत में सौर ऊर्जा उपकरणों का उत्पादन आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर बढ़ सकता है। इससे देश को सोलर पैनल और उनसे जुड़े जरूरी उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की रिपोर्ट ‘सोलर मैन्युफैक्चरिंग विजन 2047’ में अनुमान लगाया गया है कि इस क्षेत्र में 2047 तक करीब 89 अरब डॉलर यानी 8.42 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है। इस निवेश से देश में 32.3 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, सही नीतिगत समर्थन और घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत सोलर उपकरणों की पूरी सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति बना सकता है।
2047 तक भारत की सोलर बिजली उत्पादन क्षमता 2,275 गीगावॉट पहुंचाने का लक्ष्य
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत की सौर बिजली उत्पादन क्षमता मौजूदा करीब 171 गीगावॉट से बढ़कर 2047 तक 2,275 गीगावॉट हो सकती है। हालांकि, मौजूदा सरकारी योजनाएं इसी रफ्तार से जारी रहती हैं तो क्षमता करीब 1,370 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2030 तक विजन के तहत 313 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य है, जबकि मौजूदा नीतियों के आधार पर यह 278 गीगावॉट रह सकती है।
सोलर फैक्ट्रियों में हर साल औसतन 4.3 अरब डॉलर निवेश की जरूरत
सोलर उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए 2027 से 2047 के बीच हर साल औसतन 4.3 अरब डॉलर निवेश करना होगा। प्रस्तावित निवेश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सोलर सेल, इनगॉट, वेफर और पॉलीसिलिकॉन बनाने वाली फैक्ट्रियों पर खर्च किया जाएगा। ये उपकरण सोलर पैनल निर्माण की पूरी प्रक्रिया के लिए जरूरी हैं। रिपोर्ट में इनके उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।
सोलर मॉड्यूल और सेल उत्पादन में भारत की क्षमता लगातार बढ़ रही है
भारत के पास फिलहाल 233 गीगावॉट से अधिक सोलर मॉड्यूल निर्माण की क्षमता है। वहीं, सोलर सेल बनाने की क्षमता 50 गीगावॉट से ज्यादा हो चुकी है। देश में इनगॉट और वेफर उत्पादन की शुरुआती फैक्ट्रियां भी काम कर रही हैं। इसके अलावा पॉलीसिलिकॉन प्लांट तैयार किए जा रहे हैं। इन सभी क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने से भारत की घरेलू विनिर्माण व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
सोलर सेक्टर में 2047 तक 32.3 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार की संख्या मौजूदा करीब 4 लाख से बढ़कर 2030 तक 7.4 लाख हो सकती है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 32.3 लाख पहुंचने का अनुमान है। इसमें सोलर फैक्ट्रियों में सीधे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी शामिल है। फिलहाल ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 1.4 लाख है, जो 2047 तक बढ़कर 11.1 लाख हो सकती है।
घरेलू उत्पादन बढ़ने से सोलर आयात बिल में 95 प्रतिशत से ज्यादा कमी संभव
भारत का सालाना सोलर आयात बिल फिलहाल करीब 4.4 अरब डॉलर है। रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू उत्पादन बढ़ने पर 2040 के दशक की शुरुआत तक इसमें 95 प्रतिशत से ज्यादा की कमी लाई जा सकती है। अभी कुल सोलर आयात बिल में सोलर सेल की हिस्सेदारी करीब 69 प्रतिशत है। इसलिए केवल पैनल निर्माण बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। सेल, वेफर और पॉलीसिलिकॉन जैसे जरूरी उपकरणों का उत्पादन भी देश में बढ़ाना होगा। ISMA का अनुमान है कि इस दिशा में काम जारी रहा तो अगले 10 वर्षों में भारत सोलर मैन्युफैक्चरिंग की पूरी सप्लाई चेन में घरेलू मांग पूरी करने की स्थिति में पहुंच सकता है।