भारत के लिए ईरान से जुड़ा चाबहार-जहेदान रेल मार्ग एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक परिवहन कड़ी के रूप में सामने आ रहा है। ईरान ने 730 किलोमीटर लंबी चाबहार-जहेदान रेलवे लाइन का काम पूरा होने की जानकारी दी है और अंतिम सुरक्षा जांच के बाद अगले तीन से चार महीनों में रेल संचालन शुरू होने की बात कही गई है। यह मार्ग भारत को पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किए बिना अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे रूस तक पहुंच बनाने में मदद कर सकता है। चाबहार बंदरगाह पहले से ही भारत की इस रणनीति का अहम हिस्सा है और अब रेल संपर्क बनने से समुद्र से माल पहुंचाने के बाद उसे आगे जमीन के रास्ते ले जाना आसान हो सकता है।
पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत के लिए तैयार हुआ नया रेल कॉरिडोर
चाबहार-जहेदान रेल लाइन ईरान के चाबहार बंदरगाह को दक्षिण-पूर्वी ईरान के जहेदान शहर से जोड़ेगी। जहेदान अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमाओं के नजदीक स्थित है। यही वजह है कि इस रेल संपर्क को भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभी पाकिस्तान के रास्ते सीधे अफगानिस्तान या मध्य एशिया तक पहुंच बनाना भारत के लिए संभव नहीं है। ऐसे में ईरान के जरिए तैयार हो रहा यह रास्ता एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराता है। चाबहार के जरिए समुद्री रास्ते से पहुंचने वाले सामान को रेल के माध्यम से आगे भेजा जा सकेगा।
730 किलोमीटर की रेल लाइन में 33 स्टेशन और 201 पुल बनाए गए
इस परियोजना की लंबाई करीब 730 किलोमीटर है। रेल मार्ग पर कुल 33 स्टेशन, 39 सुरंगें और 201 पुल बनाए गए हैं। ईरानी अधिकारी अब अंतिम सुरक्षा परीक्षण और जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसके बाद इस रूट पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने की संभावना है। मूल योजना में यह रेल लाइन करीब 628 किलोमीटर की थी। ईरान ने 7 मई 2020 से इस मार्ग पर रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया था।
भारत के लिए चाबहार से रूस तक पहुंच बनाने का बड़ा विकल्प
भारत और ईरान के बीच चाबहार परियोजना को लेकर लंबे समय से सहयोग चल रहा है। मई 2016 में भारत और ईरान के बीच रेल परियोजना को लेकर समझौता भी हुआ था, हालांकि बाद में भारत ने रेलवे हिस्से में निवेश करने के बजाय चाबहार बंदरगाह पर अपना ध्यान केंद्रित किया। अब रेल संपर्क पूरा होने से भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सामान पहुंचाने का नया विकल्प तैयार होगा। यह मार्ग आगे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से भी जुड़ सकता है, जिससे रूस तक माल परिवहन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
हवाई रास्ते के बाद रेल संपर्क में भी पाकिस्तान पर निर्भरता घटेगी
इस नए मार्ग का सबसे बड़ा महत्व भारत के लिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी के रूप में देखा जा रहा है। चाबहार भारत को समुद्री रास्ते से ईरान तक पहुंच देता है और जहेदान से बनने वाला रेल संपर्क सामान को अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया की दिशा में आगे ले जाने की सुविधा देगा। इस तरह पाकिस्तान की जमीन से होकर गुजरने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि इस पूरे मार्ग का वास्तविक प्रभाव रेल संचालन शुरू होने, सुरक्षा मंजूरियों और आगे की कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगा। चाबहार बंदरगाह से जुड़ी अमेरिकी पाबंदियां और क्षेत्रीय परिस्थितियां भी इसके संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।