200 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस डील और सबांग पोर्ट विकास पर समझौता, इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा रणनीतिक सहयोग
भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने का फैसला किया। इसके तहत इंडोनेशिया ने भारत से लगभग 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल प्रणाली खरीदने के अपने इरादे को औपचारिक रूप दिया है। साथ ही, भारत की स्वदेशी अस्त्र बियॉन्ड विज़ुअल रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने पर भी सहमति बनी है।
दो ब्रह्मोस बैटरियां खरीदेगा इंडोनेशिया
समझौते के अनुसार इंडोनेशिया अब ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की दो बैटरियां खरीदने की तैयारी में है। शुरुआती योजना केवल एक बैटरी और 12 मिसाइलों की थी, जिसकी अनुमानित लागत 100 मिलियन डॉलर थी। अब प्रस्तावित सौदा बढ़कर 200 मिलियन डॉलर का हो गया है।
ब्रह्मोस मिसाइल करीब 300 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम सुपरसोनिक मिसाइल है, जिसे भूमि और समुद्री दोनों प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है।
अस्त्र मिसाइल भी बनेगी इंडोनेशियाई वायुसेना का हिस्सा
इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया है। 100 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली यह मिसाइल पहले से भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों में शामिल है।
अब इसे इंडोनेशिया के Su-30 Mk-1 और Mk-2 लड़ाकू विमानों में भी एकीकृत किया जाएगा। हालांकि, खरीदी जाने वाली अस्त्र मिसाइलों की अंतिम संख्या और कीमत पर दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है।
सबांग पोर्ट का संयुक्त विकास
रक्षा सहयोग के साथ-साथ भारत और इंडोनेशिया ने सबांग-आचेह बंदरगाह के संयुक्त विकास पर भी सहमति जताई है। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है और भारत के ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट प्रोजेक्ट से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर है।
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। प्रतिदिन यहां से 2.3 करोड़ बैरल से अधिक तेल और 3 से 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का वैश्विक व्यापार गुजरता है। ऐसे में सबांग पोर्ट का विकास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रक्षा सहयोग केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और इंडोनेशिया की रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा।
वर्ष 2014 के बाद से भारत ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। दक्षिण-पूर्व एशिया में इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि मलक्का, सुंडा, लोम्बोक और ओम्बी-वेटार जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग उसके क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।
दोनों देशों के बीच पहले से कोस्ट गार्ड सहयोग समझौता लागू है। अब नई रक्षा साझेदारी के जरिए समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।
भारत के रक्षा निर्यात को मिलेगी नई गति
ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों का निर्यात भारत के रक्षा उत्पादन और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारत की वैश्विक रक्षा निर्यात क्षमता मजबूत होगी और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।