नई दिल्ली। भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए देश को कितनी आर्थिक छलांग लगानी होगी? सबसे बड़ा सवाल यही है। विकसित देश बनने का मतलब सिर्फ बड़ी जीडीपी नहीं, बल्कि हर नागरिक की आय, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में व्यापक सुधार भी है।
- विकसित बनने का आर्थिक पैमाना क्या?
- भारत अभी किस श्रेणी में खड़ा है?
- अमीर देशों की प्रति व्यक्ति आय कितनी?
- 2047 तक कितना बड़ा होगा लक्ष्य?
- क्या 20 साल में बदलेगी तस्वीर?
विश्व बैंक के मौजूदा मानकों के अनुसार, जिन देशों की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI per capita) 14,375 अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक होती है, उन्हें हाई इनकम श्रेणी में रखा जाता है। भारतीय मुद्रा में यह लगभग 13 लाख रुपये सालाना (विनिमय दर के अनुसार बदल सकता है) बैठता है। वर्तमान में भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग 2,760 डॉलर है, जिससे वह अभी लोअर मिडिल इनकम श्रेणी में आता है।
यानी विकसित देशों की श्रेणी तक पहुंचने के लिए भारत को मौजूदा स्तर से प्रति व्यक्ति आय में कई गुना वृद्धि करनी होगी। केवल अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उस वृद्धि का लाभ देश की विशाल आबादी तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी होगा।
भारत आज लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। यदि मौजूदा हाई इनकम मानक को आधार माना जाए, तो इतनी बड़ी आबादी के साथ विकसित देशों की श्रेणी में पहुंचने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचना पड़ सकता है। हालांकि, यह एक अनुमानित गणना है और विश्व बैंक की आय सीमा समय-समय पर संशोधित होती रहती है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम अनुमान के अनुसार भारत 2026 में 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज कर सकता है, जो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ वृद्धि दरों में शामिल है। इसके बावजूद कई आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए भारत को लंबे समय तक ऊंची और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, विनिर्माण और निर्यात में विस्तार तथा शिक्षा-स्वास्थ्य में भारी निवेश की आवश्यकता होगी।