श्रीनगर। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे इलाकों में पाकिस्तानी सेना की गतिविधियां तेज होने की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, कुपवाड़ा और गुरेज़ सेक्टर के सामने स्थित एथमुकाम क्षेत्र में सेना की अतिरिक्त तैनाती देखी गई है। इसी क्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी मुजफ्फराबाद का दौरा कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। इन घटनाक्रमों ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान प्रशासन और सेना क्षेत्र में बढ़ते असंतोष को लेकर गंभीर चिंता में हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट पाकिस्तानी सेना की गतिविधियां बढ़ी हैं।
- दावा किया गया है कि कुपवाड़ा और गुरेज़ सेक्टर के सामने स्थित एथमुकाम क्षेत्र में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए गए हैं।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मुजफ्फराबाद का दौरा कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।
- कोटली में प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल का दावा किया गया है, जिसमें कई महिलाओं के घायल होने की बात कही गई है।
- रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (JKHRO) के हवाले से आंदोलन में अब तक 91 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है, हालांकि इनमें से केवल 43 मामलों की पुष्टि होने और कुछ मामलों के सत्यापन जारी रहने की बात भी लिखी गई है।
- यूनाइटेड गिलगित-बाल्टिस्तान स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (UGBSO) ने कथित तौर पर आंदोलनकारियों के समर्थन और पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के विरोध का बयान जारी किया है।
सूत्रों के मुताबिक, नीलम (किशनगंगा) घाटी के निकट स्थित एथमुकाम डिग्री कॉलेज परिसर और उसके आसपास हाल के दिनों में पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह भारतीय सीमा के निकट स्थित है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य तैनाती केवल नियमित गतिविधि नहीं हो सकती और इसके पीछे आंतरिक सुरक्षा संबंधी कारण भी हो सकते हैं।
इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मुजफ्फराबाद पहुंचकर स्थानीय सैन्य अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस दौरे को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
दूसरी ओर, PoK के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहने के दावे किए जा रहे हैं। स्थानीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया है। कोटली में महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में कई महिलाओं के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (JKHRO) ने आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और कई लोगों के हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। संगठन का कहना है कि मृतकों के आंकड़ों का सत्यापन अभी जारी है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
इस बीच आंदोलन को गिलगित-बाल्टिस्तान से भी समर्थन मिलने की खबरें हैं। यूनाइटेड गिलगित-बाल्टिस्तान स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (UGBSO) ने कथित तौर पर एक बयान जारी कर प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई है। संगठन का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के अनेक छात्रों का रावलाकोट और आसपास के क्षेत्रों से शैक्षणिक संबंध रहा है और वे वहां की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों का दायरा और बढ़ता है, तो पाकिस्तान के लिए आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि LoC के निकट सैन्य गतिविधियों में वृद्धि पर भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार नजर रखे हुए हैं। सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह एक ओर आंतरिक असंतोष को नियंत्रित करे और दूसरी ओर सीमा क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बनाए रखे। यदि विरोध प्रदर्शन लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल PoK की स्थिति को लेकर कई तरह के दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में घटनाक्रम पर लगातार नजर बनी हुई है। आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र सत्यापन के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार, सेना और स्थानीय प्रशासन की अगली रणनीति पर क्षेत्र की स्थिरता काफी हद तक निर्भर करेगी।
ध्यान देने योग्य बात: इस रिपोर्ट में कई गंभीर दावे (जैसे मौतों की संख्या, सैन्य जमावड़ा और मानवाधिकार उल्लंघन) किए गए हैं। ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होती है, क्योंकि संघर्ष क्षेत्रों में शुरुआती रिपोर्टों में आंकड़े और घटनाओं का विवरण समय के साथ बदल सकता है। इसलिए इन्हें आधिकारिक बयानों या कई विश्वसनीय स्वतंत्र स्रोतों से मिलान करके देखना उचित है।





