मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। ताजा घटनाक्रम की वजह भारतीय निर्वाचन आयोग के भीतर SIR को लेकर सामने आईं आपत्तियां हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें मतदाता जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। आयोग ने हालांकि कहा है कि अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
क्या है ताजा विवाद
विवाद SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है और इसमें किए गए बदलाव भी विवाद का हिस्सा बने। साथ ही मतदाता डेटा को केंद्रीकृत करने और नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे।
क्या विवाद इतना गहरा जाएगा कि ज्ञानेश कुमार को हटना पड़ेगा
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी संसद तक पहुंच चुकी है। मार्च 2026 में 193 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ हटाने का नोटिस दिया था। इसमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसद शामिल थे। हालांकि 6 अप्रैल को राज्यसभा सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने उस नोटिस को स्वीकार नहीं किया था। अब ताजा विवाद के बाद विपक्ष फिर से कार्रवाई की मांग कर रहा है।
जेन जी वोटर को लेकर भी SSR का मामला रुका है
युवा मतदाताओं को लेकर Special Summary Revision यानी SSR का मुद्दा भी चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक 2024 के बाद वार्षिक SSR प्रक्रिया नहीं हो सकी, जिससे हर साल 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। मई 2026 में दोनों चुनाव आयुक्तों ने SSR को सामान्य समय-सीमा में कराने के पक्ष में राय दी थी और अंतिम फैसला CEC के स्तर पर लंबित बताया गया था।
क्या Gen Z या CJP फिर से प्रोटेस्ट करेगी
ताजा विवाद के बाद विरोध की गतिविधियां भी सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR रोकने की मांग तेज की है। बिहार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जबकि दिल्ली में भी विरोध कार्यक्रमों की खबर सामने आई है। इसके अलावा CJP नाम के एक संगठन ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस और संभावित आंदोलन का संकेत दिया है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर एकजुट विपक्ष
विपक्ष ने दोबारा महाभियोग की रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग भी उठ रही है। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों की रिपोर्ट को सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा बताते हुए कहा है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। इसलिए आगे की स्थिति संसद की प्रक्रिया, न्यायिक कार्रवाई और चुनाव आयोग के जवाब पर निर्भर करेगी।