सरकार ने विदेशी फंड पाने के नियमों में बदलाव किया है। जानें गैज़ेट नोटिफिकेशन में क्या कहा गया है 

सरकार ने विदेशी फंड पाने के नियमों में बदलाव किया है। जानें गैज़ेट नोटिफिकेशन में क्या कहा गया है

सरकार ने विदेशी फंड पाने के नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत NGOs को पहले से तय कामों और अपने काम के इलाके की लिस्ट में से चुनना होगा। इसमें धर्म से जुड़ी कई तरह की गतिविधियों की इजाज़त है, लेकिन ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट’ (FCRA) के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए योग्य कई कैटेगरी में धर्म-परिवर्तन को साफ़ तौर पर बाहर रखा गया है।

 

सोमवार को जारी एक सरकारी नोटिफिकेशन में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि अगर किसी संस्था के मुख्य पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो उन्हें FCRA के तहत विदेशी फंड पाने के लिए रजिस्ट्रेशन या पहले से मंज़ूरी देने पर “आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा”।

जानें क्या लिखा है नोटिफिकेशन में 

नोटिफिकेशन के मुताबिक, बदले हुए नियमों में एक अपवाद भी रखा गया है। इसके तहत केंद्र सरकार एक आदेश के ज़रिए ऐसे मामलों या हालात तय कर सकती है जिनमें विदेशी नागरिकों को FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन या पहले से मंज़ूरी के लिए किसी संस्था का “मुख्य पदाधिकारी” बनने की इजाज़त दी जा सकती है।

सरकार ने FCRA नियम, 2011 में कई बदलावों की घोषणा की है, जिनसे भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और संस्थाओं के विदेशी फंड लेने और इस्तेमाल करने के तरीके को लेकर जवाबदेही और सख्त हो गई है।

संशोधनों ने “किसी व्यक्ति (इंडिविजुअल) के अलावा अन्य व्यक्ति के संबंध में मुख्य पदाधिकारी” की परिभाषा का दायरा बढ़ा दिया है। इसमें कंपनी के डायरेक्टर, फर्म के पार्टनर, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के ‘कर्ता’ और एसोसिएशन के मैनेजमेंट पर कंट्रोल रखने वाले किसी भी व्यक्ति जैसी कई भूमिकाएं शामिल हैं।

सरकार ने एक नया नियम लागू किया है जिसके तहत विदेशी फंड पाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाली NGO को अपने काम का सही मकसद और उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का नाम बताना होगा जहां वे काम करेंगी।

नोटिफिकेशन में कहा गया है, “रजिस्ट्रेशन के लिए हर एप्लीकेशन में उस मकसद या मकसदों का ज़िक्र करना होगा जिनके लिए रजिस्ट्रेशन मांगा जा रहा है। ये मकसद सिर्फ़ उन मकसदों की लिस्ट से चुने जाने चाहिए जो इन नियमों के साथ जुड़ी अनुसूची (Schedule) में बताए गए हैं। साथ ही, उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों का भी ज़िक्र करना होगा जहां एसोसिएशन अपनी गतिविधियां चलाने का इरादा रखती है।”

इसमें कहा गया है कि NGO को जारी किए गए सर्टिफिकेट पर ये जानकारी दी जाएगी।

अब आवेदकों को नियमों में दी गई “सूची” (Schedule) में से अपनी गतिविधियाँ चुननी होंगी, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक कैटेगरी के मकसद शामिल हैं।धार्मिक मकसद के तहत कई तरह की गतिविधियाँ बताई गई हैं, जैसे धार्मिक स्थलों का निर्माण, मरम्मत और रखरखाव, धार्मिक शिक्षा, और भक्ति संगीत को बढ़ावा देना वगैरह।

तीन मकसदों को लेकर है खास नियम 

नियमों में बताया गया है कि तीन मकसद– धार्मिक शिक्षा, आस्था की परंपराओं का डॉक्यूमेंटेशन और स्थानीय मान्यताओं का संरक्षण– “धर्म परिवर्तन कराए बिना” पूरे किए जाने चाहिए।

यह शर्त “स्थानीय और आदिवासी आस्था की प्रथाओं, रीति-रिवाजों और पूजा-पद्धतियों का डॉक्यूमेंटेशन, संरक्षण और पुनरुद्धार” और “धार्मिक शिक्षा, नैतिक शिक्षा, सत्संग, प्रवचन और ध्यान शिविर आयोजित करने” के मामलों में भी बताई गई है।

नियमों के अनुसार, 2026 से पहले रजिस्टर्ड सभी संस्थाओं को एक साल का समय दिया गया है ताकि वे सरकार को अपने खास मकसद और उन राज्यों के बारे में बता सकें जिन्हें वे अपने रजिस्ट्रेशन में बनाए रखना चाहती हैं।

सरकार ने बदले हुए नियमों के तहत एक फीस स्ट्रक्चर भी लागू किया है, जिसमें एप्लीकेशन में जोड़े गए हर अतिरिक्त राज्य या मकसद के लिए 300 रुपये की अतिरिक्त फीस लगेगी।निष्क्रिय NGO को लाइसेंस अपने पास रखने से रोकने के लिए, सरकार ने पिछले दो फाइनेंशियल ईयर में अपनी चुनी हुई गतिविधियों पर विदेशी योगदान से कम से कम 10 लाख रुपये खर्च करने की सीमा तय की है।

किसी NGO के लिए अपना रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराने या उसे रद्द होने से बचाने के लिए, यह ज़रूरी है कि उसने पिछले दो सालों में विदेशी योगदान की रकम अपनी चुनी हुई गतिविधियों पर खर्च की हो।

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि “पूर्व अनुमति” (Prior Permission) के तहत खास मकसद के लिए विदेशी फंड पाने वाले NGO को फंड की दूसरी या बाद की कोई भी किस्त तभी जारी की जाएगी, जब उसने पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर लिया हो।

इसमें कहा गया है कि सरकार इस्तेमाल की पुष्टि करने के लिए फील्ड जांच करेगी।

विदेशी फंड पाने वाले NGO को अब FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन या रिन्यूअल के लिए अपनी एप्लीकेशन में अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी।

अगर पैसा “बिचौलिये रेमिटेंस माध्यमों” (intermediary remittance vehicles) या “डोनर एडवाइज्ड फंड्स” (Donor Advised Funds) के ज़रिए आता है, तो NGO को अपनी एप्लीकेशन में असली डोनर (पैसे का मूल स्रोत) के बारे में बताना होगा।

नियमों के अनुसार, अब सालाना रिटर्न में फाइनेंशियल स्टेटमेंट के साथ-साथ “विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट” भी शामिल करनी होगी।NGOs को यह बताना होगा कि क्या उन्होंने या उनके मुख्य सदस्यों ने कोई किताब या लेख प्रकाशित किया है, क्योंकि उन्हें “समाचार या समसामयिक मामलों” को बनाने या प्रसारित करने की मनाही है।

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