बेसहारा बच्चों की अभिभावक बनी योगी सरकार, 66 बेटियों की कराई शादी, हजारों को मिल रही आर्थिक मदद

up Yogi government steps guardian for destitute children

उत्तर प्रदेश में अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए योगी सरकार की मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। सरकार न केवल ऐसे बच्चों की शिक्षा और परवरिश की जिम्मेदारी निभा रही है, बल्कि माता-पिता की कमी को भी काफी हद तक पूरा करने का प्रयास कर रही है। योजना के तहत अब तक 66 बेसहारा बेटियों का सम्मानपूर्वक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक बेटी को नए जीवन की शुरुआत के लिए एक लाख एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

  1. 66 अनाथ बेटियों के हाथ पीले
  2. 10 हजार बच्चों को मासिक सहायता
  3. शिक्षा और तकनीक से सशक्तिकरण
  4. संपत्ति और भविष्य की सुरक्षा
  5. बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिए वर्ष 2021 में शुरू की गई मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना आज हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। वर्तमान में प्रदेश के 10,904 बच्चे इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सरकार इन बच्चों को 18 वर्ष की आयु या 12वीं कक्षा तक प्रति माह 4 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, जिससे उनकी पढ़ाई और दैनिक जरूरतों में मदद मिल सके।

योजना के तहत बच्चों की शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब तक 8,085 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित किए जा चुके हैं। वहीं 11 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कस्तूरबा गांधी एवं अटल आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए राजकीय बाल देखरेख संस्थाओं में मुफ्त आवास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

सरकार ने बच्चों की चल-अचल संपत्तियों की सुरक्षा के लिए जिलाधिकारियों को संरक्षक की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं को भी योजना में शामिल किया गया है जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या नीट, जेईई और क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे युवाओं को 2,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

महिला कल्याण विभाग के अनुसार योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा स्वयं को असहाय महसूस न करे। आर्थिक सहायता, शिक्षा, डिजिटल संसाधन और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से सरकार अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मानजनक भविष्य देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

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