स्पोर्ट्स डेस्क। इंग्लैंड दौरे पर टी-20 सीरीज़ में भारत की लगातार हार के बाद टीम प्रबंधन, कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। आयरलैंड के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड के हाथों भी सीरीज़ गंवाने से क्रिकेट जगत में टीम की रणनीति, चयन और प्रदर्शन पर तीखी बहस छिड़ गई है। पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ मान रहे हैं कि टीम विदेशी परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने में पूरी तरह नाकाम रही।
सीरीज़ के अंतिम मुकाबले में भारत को 258 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन टीम 201 रन ही बना सकी। बल्लेबाज़ी क्रम लगातार दबाव में बिखरता रहा और गेंदबाज़ भी इंग्लैंड के आक्रामक बल्लेबाज़ों को रोकने में असफल रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर ने हार के बाद स्वीकार किया कि लगातार विकेट गिरना और फील्डिंग में हुई गलतियां टीम पर भारी पड़ीं।
पूर्व विकेटकीपर दीप दासगुप्ता ने कहा कि भारतीय बल्लेबाज़ी में स्पष्ट रणनीति नज़र नहीं आई। वहीं पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन का मानना है कि इंग्लैंड की परिस्थितियां आईपीएल से बिल्कुल अलग हैं और भारतीय बल्लेबाज़ों को स्विंग तथा उछाल के अनुसार अपनी तकनीक बदलनी होगी। पूर्व क्रिकेटर अतुल वासन ने भी टीम के प्रदर्शन को निराशाजनक बताते हुए खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप धैर्य से खेलने की सलाह दी।
पूर्व क्रिकेटर मदन लाल ने हालांकि कप्तान श्रेयस अय्यर का बचाव किया। उनका कहना है कि कप्तान उतना ही प्रभावी होता है जितना मजबूत उसकी टीम होती है। उन्होंने कहा कि नई टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने में समय लगता है और केवल कप्तान को हार का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
टीम चयन भी विवाद का बड़ा विषय बन गया है। कई पूर्व खिलाड़ियों ने कुछ अनुभवी खिलाड़ियों को बाहर रखने और टीम संयोजन पर सवाल उठाए हैं। वहीं युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भी निराश किया, जिससे चयन प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर भी क्रिकेट प्रशंसकों ने टीम की बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी, फील्डिंग और रणनीति की जमकर आलोचना की है। कई लोगों ने विदेशी दौरों के लिए अलग तैयारी और बेहतर टीम संयोजन की मांग की है।
उधर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भी संकेत दिए हैं कि इंग्लैंड दौरे के बाद टीम के प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। वनडे सीरीज़ समाप्त होने के बाद टीम प्रबंधन के साथ बैठक में यह आकलन किया जाएगा कि विदेशी दौरे पर किन कारणों से टीम अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी और आगे सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।





