नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के पांच दिन बाद भी तबाही का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। एक तरफ नदियों का पानी फिर बढ़ने लगा है, दूसरी तरफ मलबे के ढेरों से शव और मानव अवशेष बरामद हो रहे हैं। हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। नेपाल सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 734 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता हैं। और अब सबसे बड़ा डर यह है कि राहत और खोज अभियान के बीच एक और बाढ़ की स्थिति पैदा न हो जाए। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में लोगों को सतर्क रहने को कहा है। सुनकोशी नदी भी सिंधुली में चेतावनी स्तर के ऊपर पहुंच गई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर बाढ़ का खतरा नहीं है।
2,498 लोग अब भी लापता, हजारों परिवार अपनों की तलाश में
भोटेकोशी का बढ़ा जलस्तर, सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की जंग
भारत ने भेजी 68.5 टन राहत सामग्री, सुरंग रेस्क्यू और फोरेंसिक टीम भी पहुंची
734 मौतें… लेकिन असली चिंता 2,498 लापता लोगों की
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के रविवार सुबह के आंकड़ों ने तबाही की भयावह तस्वीर सामने रखी है। चितवन में सबसे ज्यादा 259 शव बरामद हुए हैं। नवलपरासी ईस्ट में 184, नवलपरासी वेस्ट में 82, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धादिंग में 50, तनहूं में 36 और रसुवा में 13 शव मिलने की जानकारी दी गई है। कई स्थानों पर शवों के बजाय मानव अवशेष मिल रहे हैं, जिससे मृतकों की पहचान करना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
लेकिन आंकड़ों के पीछे जो मानवीय त्रासदी छिपी है, वह और भयावह है।
करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक और बड़ी संख्या में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले लोग शामिल हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीयों को लेकर भी परिवारों की चिंता बनी हुई है।
यानी नेपाल में अभी राहत अभियान का सबसे मुश्किल चरण शुरू हुआ है—मलबे में जिंदगी तलाशने का।
नदी फिर बढ़ी… बचाव दल भी खतरे में
बाढ़ से पहले ही तबाह हो चुके इलाकों में अब नदियों का बढ़ता जलस्तर बचाव अभियान के लिए नई चुनौती बन गया है। रसुवा में भोटेकोशी का बहाव रात के दौरान अचानक बढ़ा। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया। सुनकोशी भी चेतावनी स्तर के ऊपर पहुंची। बचावकर्मियों के सामने अब दोहरी चुनौती है—मलबे में फंसे लोगों को निकालना और खुद को अचानक आने वाली बाढ़ से बचाना। यही वजह है कि कई इलाकों में राहत दलों को ऊंचे स्थानों पर रहने और हालात पर लगातार नजर रखने की चेतावनी दी गई है।
सुरंगों के अंदर जिंदगी और मौत के बीच जंग
नेपाल की इस त्रासदी का सबसे भयावह अध्याय हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में लिखा जा रहा है। रसुवा में त्रिशूली क्षेत्र की एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है। बचाव दल कीचड़ और मलबे को हटाकर सुरंग के अंदर रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रविवार को बचाव अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता भी मिली। सुरंग तक एक पाइप पहुंचाकर उसके जरिए अंदर हवा भेजने की कोशिश की गई। लेकिन लगातार बारिश और नदी के बढ़ते पानी ने अभियान को और जोखिम भरा बना दिया है। यहां हर मिनट महत्वपूर्ण है, क्योंकि सुरंग के भीतर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन, पानी और भोजन पहुंचाना और उनके लिए सुरक्षित रास्ता बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस आपदा में भारत राहत और बचाव के मोर्चे पर लगातार सहायता पहुंचा रहा है। भारत ने राहत सामग्री की चौथी खेप के तौर पर 11 टन सामान लेकर भारतीय वायुसेना का C-130J विमान नेपाल भेजा। इसमें सुरंग बचाव उपकरण, तकनीकी टीम, फोरेंसिक विशेषज्ञ और DNA पहचान के लिए जरूरी उपकरण शामिल हैं।
भारत अब तक नेपाल को कुल 68.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। इसमें दवाइयां, भोजन, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां, पोर्टेबल जनरेटर और दूसरे जरूरी उपकरण शामिल हैं। भारत की मदद केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं है। नेपाल में सुरंगों की स्थिति का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ टीम पहुंच चुकी है और विशेष सुरंग-रेस्क्यू टीम को भी उपकरणों के साथ भेजा जा रहा है।
भारतीयों की तलाश भी जारी
इस आपदा में भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बड़ी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक 108 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है, जबकि 275 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारत लगातार नेपाल और चीन के अधिकारियों के संपर्क में है। चीन की ओर से भी कई भारतीयों के सुरक्षित होने और नेपाल की तरफ आने की प्रक्रिया जारी है। यानी एक तरफ नेपाल अपने नागरिकों को खोज रहा है, तो दूसरी तरफ भारत अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार अभियान चला रहा है।
टूटे पुल, बह गई सड़कें… राहत पहुंचाना सबसे बड़ा इम्तिहान
बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली। इसने नेपाल की परिवहन व्यवस्था को भी बुरी तरह तोड़ दिया है। सड़कें बह गईं। पुल टूट गए। कई गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया। ऐसे इलाकों में राहत सामग्री ट्रकों से पहुंचाना संभव नहीं है। इसलिए हेलिकॉप्टरों के जरिए लोगों को निकाला और जरूरी सामान पहुंचाया है। भारत ने नेपाल में अस्थायी संपर्क बहाल करने के लिए 230 फुट लंबे स्टील ब्रिज का सामान भेजा है। 16 ट्रक इसके उपकरण लेकर पहुंच चुके हैं और सात अन्य बेली ब्रिज के लिए उपकरण भेजने की तैयारी है। यह इसलिए अहम है क्योंकि सड़क संपर्क बहाल हुए बिना राहत अभियान को व्यापक स्तर पर चलाना बेहद मुश्किल होगा।
अस्पतालों पर भी संकट
बाढ़ के बाद दूसरी बड़ी चुनौती अब स्वास्थ्य संकट की है। कई इलाकों में अस्पतालों तक दवाइयां और ईंधन पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से साफ पेयजल की समस्या बढ़ रही है। गंदा पानी, सड़ते शव, कीचड़ और बिजली-पानी की व्यवस्था में टूटन के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। यानी नेपाल अब सिर्फ बाढ़ से बचने की लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि बाढ़ के बाद पैदा होने वाली बीमारियों और मानवीय संकट से भी जूझ रहा है।
मौत के आंकड़े से बड़ी है तबाही की तस्वीर
इस त्रासदी को केवल 734 मौतों के आंकड़े से समझना मुश्किल है। हर शव के पीछे एक परिवार है। हर लापता व्यक्ति के पीछे किसी का इंतजार है। हर टूटे पुल के पीछे किसी गांव की रोजमर्रा की जिंदगी है। हर बंद सड़क के पीछे अस्पताल, बाजार और राहत केंद्र से कटा हुआ एक इलाका है। और सबसे बड़ी चिंता यह है कि तबाही खत्म होने के बाद भी संकट खत्म नहीं होगा। नेपाल के वित्त मंत्री के अनुसार पुनर्निर्माण की लागत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है। बाढ़ ने बुनियादी ढांचे, जलविद्युत परियोजनाओं, सड़कों और सीमावर्ती व्यापारिक संपर्कों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
नेपाल के सामने अब तीन मोर्चों की जंग
आज नेपाल तीन मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है।
पहला—मलबे में जिंदगी तलाशने की जंग।
दूसरा—बढ़ती नदियों और नई बाढ़ से लोगों को बचाने की जंग।
तीसरा—टूटे हुए नेपाल को दोबारा खड़ा करने की जंग।
और इन तीनों मोर्चों के बीच भारत की सहायता एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आई है। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या मलबे के नीचे अभी भी कोई जिंदगी सांस ले रही है? सुरंगों के भीतर फंसे लोग, हजारों लापता नागरिक और नदी किनारे बसे परिवार इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं। नेपाल में राहत अभियान का पांचवां दिन है, लेकिन इस त्रासदी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई। मलबा अभी हटना बाकी है… हजारों अपनों का इंतजार अभी बाकी है… और नेपाल के सामने सबसे कठिन इम्तिहान अभी बाकी है।