Sunday, August 23, 2026
  • Contact
India News
  • मुख्य समाचार
  • राजनीति
  • संपादक की पसंद
  • शहर और राज्य
    • उत्तर प्रदेश
      • आगरा
      • कानपुर
      • लखनऊ
      • मेरठ
    • छत्तीसगढ
      • जगदलपुर
      • बिलासपुर
      • भिलाई
      • रायपुर
    • दिल्ली
    • बिहार
      • पटना
    • मध्य प्रदेश
      • इंदौर
      • ग्वालियर
      • जबलपुर
      • भोपाल
    • महाराष्ट्र
      • नागपुर
      • नासिको
      • पुणे
      • मुंबई
    • राजस्थान
      • अजमेर
      • कोटा
      • जयपुर
      • जैसलमेर
      • जोधपुर
  • स्टार्टअप
  • कृषि
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • धर्म
  • ऑटो
  • सरकारी नौकरी
  • वीडियो
No Result
View All Result
India News
Home कृषि

पहले बुवाई में ब्रेक, अब पकती फसल को मौसम का धोखा—खरीफ पैदावार पर कितना बड़ा खतरा?

DigitalDesk by DigitalDesk
August 23, 2026
in कृषि, स्पेशल
0
Weather plays havoc with ripening crops
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterWhatsapp

देश के किसानों के लिए खरीफ सीजन की शुरुआत ही मौसम की चुनौती से हुई थी। जून में कमजोर बारिश और सूखे जैसे हालात ने बुवाई की रफ्तार धीमी कर दी। बाद में मानसून ने रफ्तार पकड़ी तो किसानों ने तेजी से बुवाई पूरी की, लेकिन अब एक नई चिंता सामने आ रही है। सितंबर में सामान्य से कम बारिश और अधिक तापमान का खतरा खरीफ फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकता है। यानी किसानों ने जिस फसल को मुश्किलों के बीच खेत में खड़ा किया है, उसके पकने के अहम दौर में मौसम फिर परीक्षा ले सकता है।

सितंबर क्यों है खरीफ के लिए बेहद अहम?

Related posts

Small businesses run by rural women

ग्रामीण महिलाओं के छोटे कारोबार को मिलेगा बड़ा बाजार, इनक्यूबेटर बनेंगे नई ताकत…

August 23, 2026
Startup Schemes 2026

स्टार्टअप योजनाएं 2026: सरकारी मदद से उद्यमिता को नई उड़ान… जानें क्या है स्टार्टअप इंडिया योजना और कैसे मिलेगा इसका लाभ

August 23, 2026

धान, सोयाबीन और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के लिए सितंबर का मौसम बेहद महत्वपूर्ण होता है। यही वह समय है जब पौधों में दाने भरने और फसल के अंतिम विकास की प्रक्रिया तेज होती है। इस दौरान पर्याप्त नमी मिलने से दाने का आकार, वजन और गुणवत्ता बेहतर होती है।

अगर इसी चरण में बारिश कम हो जाती है और तापमान सामान्य से ऊपर चला जाता है तो फसलों पर दोहरी मार पड़ सकती है। मिट्टी में नमी घटेगी, पौधों पर गर्मी का दबाव बढ़ेगा और कई इलाकों में सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। बारिश की कमी लंबी चली तो उत्पादन में गिरावट का जोखिम भी बढ़ जाएगा।

यही वजह है कि सितंबर का मौसम इस साल खरीफ किसानों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

अल-नीनो क्यों बढ़ा रहा चिंता?

दक्षिण प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी यानी अल-नीनो का असर दुनिया के मौसम पर पड़ता है। समुद्र की सतह का तापमान बदलने से वायुमंडलीय परिसंचरण और हवाओं के पैटर्न प्रभावित होते हैं। इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के स्वरूप पर दिखाई दे सकता है।

एपैक क्लाइमेट सेंटर यानी APCC के सितंबर से नवंबर के पूर्वानुमान में एशिया समेत दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताई गई है। भारत के लिए सितंबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका इस पूर्वानुमान का सबसे चिंताजनक हिस्सा है।

हालांकि यह कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं है कि हर क्षेत्र में सूखा पड़ेगा। मौसम का वास्तविक असर क्षेत्र-दर-क्षेत्र अलग हो सकता है। लेकिन कम बारिश और अधिक तापमान का संयोजन कृषि के लिए जोखिम जरूर बढ़ाता है।

खरीफ के बाद रबी पर भी असर?

चिंता सिर्फ खरीफ तक सीमित नहीं है। सितंबर की बारिश रबी सीजन की जमीन तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गेहूं, चना, सरसों और आलू जैसी फसलों की बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होना जरूरी है।

यदि सितंबर में बारिश कमजोर रहती है और अक्टूबर-नवंबर में तापमान भी अधिक रहता है तो खेतों की नमी तेजी से कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल, बोरवेल या नहरों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा।

इससे खेती की लागत बढ़ सकती है। अगर खेत तैयार करने और बुवाई में देरी हुई तो रबी फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। यानी खराब मौसम का असर एक सीजन से दूसरे सीजन तक पहुंचने का जोखिम पैदा हो सकता है।

जून की कमजोरी के बाद मानसून ने संभाला मोर्चा

हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। जून में कमजोर शुरुआत के बाद जुलाई और अगस्त में मानसून की स्थिति में सुधार हुआ। हिंद महासागर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD की अनुकूल स्थिति ने भी मानसून को समर्थन दिया और देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई।

इसका फायदा यह हुआ कि किसानों ने रुकी हुई खरीफ बुवाई को तेजी से पूरा किया। यानी शुरुआती झटका काफी हद तक संभाल लिया गया।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त 2026 तक देश में करीब 1,056.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी थी। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,072.77 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार बुवाई का रकबा करीब 16.07 लाख हेक्टेयर या 1.50 फीसदी कम है।

यह अंतर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन अब चुनौती यह है कि खेतों में खड़ी फसल को सितंबर में पर्याप्त पानी और अनुकूल तापमान मिले।

किसान और सरकार के सामने क्या चुनौती?

अब सबसे जरूरी है कि मौसम की निगरानी लगातार की जाए और किसानों को स्थानीय स्तर पर समय रहते सलाह मिले। जहां बारिश कम हो वहां सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिट्टी में नमी संरक्षण और फसल की अवस्था के अनुसार पानी का इस्तेमाल नुकसान को कम कर सकता है।

किसानों के लिए भी फसल की स्थिति के अनुसार सिंचाई और नमी संरक्षण बेहद अहम होगा। सरकार और कृषि विभागों को मौसम आधारित सलाह को गांव-गांव तक पहुंचाना होगा।

निष्कर्ष—फसल खड़ी है, लेकिन मौसम की परीक्षा बाकी

इस खरीफ सीजन की कहानी दो हिस्सों में बंटी हुई है। पहले जून की कमजोर बारिश ने बुवाई रोकी, फिर जुलाई-अगस्त की बारिश ने किसानों को संभाला। अब सितंबर तय करेगा कि खेत में खड़ी फसल कितनी अच्छी पैदावार देती है।

अगर बारिश सामान्य के करीब बनी रहती है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन कम बारिश और अधिक तापमान का दौर लंबा खिंचा तो धान, मक्का और सोयाबीन समेत कई खरीफ फसलों पर उत्पादन का दबाव बढ़ सकता है।

सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि हिंद महासागर की अनुकूल परिस्थितियां मानसून को आगे भी सहारा देती रहें। क्योंकि इस वक्त किसानों की नजर सिर्फ आसमान पर नहीं, बल्कि सितंबर की हर बारिश पर टिकी है।

Tags: #Initial sowing setback #Weather plays havoc with ripening crops #Kharif yield #Major threat to crops
LIVE India News

लाइव इंडिया न्यूज 2016 से आप तक खबरें पंहुचा रहा है। लाइव इंडिया वेबसाइट का मकसद ब्रेकिंग, नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, बिजनेस और अर्थतंत्र से जुड़े हर अपडेट्स सही समय पर देना है। देश के हिंदी भाषी राज्यों से रोजमर्रा की खबरों से लेकर राजनीति नेशनल व इंटरनेशनल मुद्दों से जुडी खबरें और उनके पीछे छुपे सवालों को बेधड़क सामने लाना, देश-विदेश के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों का विश्लेषण बेबाकी से करना हमारा मकसद है।

Vihan Limelite Event & Entertainment Pvt Ltd
Regd Office Flat No 1
Mig 3 E 6
Arera Colony Bhopal

Branch Office
Main Road. Tikraparaa
Raipur CG

Director Deepti Chaurasia
Mobile No 7725016291

Email id - liveindianewsandviews@gmail.com

Currently Playing

चार महीने में बदले सियासी तेवर: मोदी सरकार पर शायरी से वार करने वाली सायोनी घोष अब बनेंगी सरकार की आवाज़

Saayoni Ghosh

चार महीने में बदले सियासी तेवर: मोदी सरकार पर शायरी से वार करने वाली सायोनी घोष अब बनेंगी सरकार की आवाज़

मुख्य समाचार
Drone Technology: चीन में हर काम कर रहे हैं ड्रोन! देखकर रह जाएंगे हैरान

Drone Technology: चीन में हर काम कर रहे हैं ड्रोन! देखकर रह जाएंगे हैरान

मुख्य समाचार
क्यों लगातार फेल हो रही टीम इंडिया? मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर उठाए बड़े सवाल

क्यों लगातार फेल हो रही टीम इंडिया? मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर उठाए बड़े सवाल

मुख्य समाचार

RSS Unknown Feed

  • Contact

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

No Result
View All Result
  • Home
  • मुख्य समाचार
  • शहर और राज्य
  • राजनीति
  • बिजनेस
  • संपादक की पसंद
  • मनोरंजन
  • स्टार्टअप
  • धर्म
  • कृषि

© Copyright 2022,LIVE INDIA NEWS. All Rights Reserved | Email: Info@liveindia.news

Go to mobile version