एमपी में जल संरक्षण अब बन रहा जन आंदोलन..मध्यप्रदेश जल संचयन में तीसरे स्थान पर…6 हजार करोड़ से चल रहा जल अभियान

mp cm

एमपी में जल संरक्षण अब बन रहा जन आंदोलन…मध्यप्रदेश जल संचयन में तीसरे स्थान पर…6 हजार करोड़ से चल रहा जल अभियान

भोपाल: मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को लेकर सरकार ने व्यापक स्तर पर पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि पानी बचाने के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया जा रहा है, जिसे जन आंदोलन का रूप देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण के साथ अनौपचारिक चर्चा में इस अभियान की प्रगति और सरकार की विभिन्न उपलब्धियों की जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश देश में जल संचयन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के नागरिकों और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी का परिणाम है। राज्य में जल संरक्षण के लिए लगभग 6 हजार 278 करोड़ रुपए का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि 2.44 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य चिन्हित कर लिए गए हैं। इन कार्यों पर करीब 6 हजार 236 करोड़ रुपए की लागत से जल विकास, निकास और विस्तार कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में इस अभियान की नियमित समीक्षा करें और स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसे जनभागीदारी के माध्यम से ही सफल बनाया जा सकता है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में मिली बड़ी उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल को घोषित कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम पिछले 16 वर्षों में सर्वश्रेष्ठ रहे हैं। खास बात यह रही कि इस बार भी बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बेटों से 10 प्रतिशत अधिक सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री ने इसे सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम बताया।

उन्होंने यह भी बताया कि जो विद्यार्थी परीक्षा में असफल हुए हैं, उन्हें “रुक जाना नहीं योजना” के तहत दूसरा अवसर दिया जा रहा है। मई माह में आयोजित होने वाली इन परीक्षाओं से छात्रों को राहत मिलेगी और उनका एक साल खराब नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अमरकंटक क्षेत्र के विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक को “नो मूवमेंट-नो कंस्ट्रक्शन जोन” घोषित करने की आवश्यकता है, ताकि वहां की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र के इकोलॉजिकल बैलेंस को बनाए रखने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।

संकल्प से समाधान अभियान की सफलता पर भी मुख्यमंत्री ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 45 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 99.90 प्रतिशत मामलों का सफल निराकरण किया गया है। यह अभियान प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने में अहम साबित हुआ है।

जनजातीय वर्ग के विकास को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि राज्य की 21 प्रतिशत से अधिक आबादी जनजातीय वर्ग से संबंधित है और उनके समग्र विकास के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। हाल ही में आयोजित कार्यशाला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा का भी उन्होंने उल्लेख किया। भोपाल से ओरछा और चंदेरी के लिए शुरू की गई इस सेवा से पर्यटन को नई गति मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव को दिव्य स्वरूप में विकसित किया जाएगा। यहां 17.41 करोड़ रुपए की लागत से “परशुराम-श्रीकृष्ण लोक” बनाया जाएगा, जिसमें संग्रहालय और विभिन्न दीर्घाओं के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया जाएगा। जनगणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह देश के विकास की नींव है। प्रदेश में 16 अप्रैल से स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 30 अप्रैल तक चलेगी। इसके बाद मई में मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सही और सटीक जानकारी देकर इस प्रक्रिया में भाग लें।

अंत में मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें “नारी शक्ति वंदन” विषय पर चर्चा होगी। इस सत्र में महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के इस संवाद में जल संरक्षण से लेकर शिक्षा, पर्यटन, जनकल्याण और महिला सशक्तिकरण तक कई महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से सामने आईं।

Exit mobile version