आजकल जब बड़े पर्दे पर एक्शन, थ्रिलर और पैन इंडिया फिल्मों का दबदबा है, ऐसे समय में ‘दुल्हनिया ले आएगी’ एक सिंपल फैमिली एंटरटेनर बनकर आती है। फिल्म खुद को जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाने की कोशिश नहीं करती। इसकी ताकत इसकी आसान कहानी, रिश्तों से जुड़ी भावनाएं और कलाकारों का दमदार अभिनय है। यही वजह है कि फिल्म शुरुआत से लेकर अंत तक दर्शकों को जोड़े रखने में सफल रहती है।
फिल्म: दुल्हनिया ले आएगी
स्टार कास्ट: महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा, खुशाली कुमार, ओमकार कपूर, स्नेहिल दीक्षित मेहरा (बीसी आंटी)
निर्देशक: आकाशादित्य लामा
रिलीज़ डेट: 24 जुलाई 2026
कहाँ देखें: सिनेमाघरों में
रन टाइम: 2 घंटे 7 मिनट
रेटिंग: 4 स्टार्स
कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी नव्या (खुशाली कुमार) की है, जिसकी उम्र 32 साल हो चुकी है। परिवार चाहता है कि अब उसकी शादी हो जाए, लेकिन हालात हर बार कुछ और मोड़ ले लेते हैं। जब आखिरकार शादी की तैयारियां शुरू होती हैं, तो कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है। नव्या की जिंदगी में एक नहीं, बल्कि कई दूल्हों की एंट्री हो जाती है। इसके बाद शुरू होता है कन्फ्यूजन, कॉमेडी, रिश्तों और इमोशंस से भरा सफर। आखिर असली दूल्हा कौन है और नव्या की शादी किससे होगी? यही सवाल फिल्म को आखिर तक दिलचस्प बनाए रखता है।
खुशाली कुमार हैं फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
अगर फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि की बात की जाए, तो वह हैं खुशाली कुमार। उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनके अभिनय में बनावट नहीं, बल्कि सहजता नजर आती है। इमोशनल सीन्स में वह प्रभावित करती हैं, रोमांटिक पलों में स्क्रीन पर अच्छी लगती हैं और कॉमिक सीन्स में भी उनका अंदाज स्वाभाविक है।
पिछले कुछ समय में खुशाली कुमार ने लगातार अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया है और इस फिल्म में उनका अनुभव साफ दिखाई देता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर खुशाली का अभिनय इतना मजबूत नहीं होता, तो फिल्म का असर भी इतना प्रभावी नहीं होता।
बाकी कलाकारों ने भी बढ़ाया फिल्म का स्तर
महेश मांजरेकर हमेशा की तरह अपने किरदार में जान डालते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हर बार प्रभाव छोड़ती है। पीयूष मिश्रा अपने बेहतरीन अभिनय और संवाद अदायगी से कहानी को मजबूती देते हैं। वहीं ओमकार कपूर और स्नेहिल दीक्षित मेहरा भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय करते हैं। पूरी स्टारकास्ट के बीच अच्छी केमिस्ट्री दिखाई देती है, जो फिल्म को विश्वसनीय बनाती है।
तकनीकी पक्ष कैसा है?
निर्देशक ने फिल्म को ज्यादा जटिल बनाने की कोशिश नहीं की। कहानी सीधी रेखा में आगे बढ़ती है और यही इसकी खूबी भी है। सिनेमैटोग्राफी रंगीन और आकर्षक है। शादी वाले सीन्स और पारिवारिक माहौल को खूबसूरती से फिल्माया गया है। फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है और बैकग्राउंड स्कोर कई भावनात्मक दृश्यों को और प्रभावी बना देता है।
हालांकि, दूसरे हाफ में फिल्म थोड़ी धीमी पड़ती है। कुछ दृश्य लंबे महसूस होते हैं और पटकथा में नएपन की कमी भी दिखाई देती है। अगर एडिटिंग थोड़ी और टाइट होती, तो फिल्म का असर और बेहतर हो सकता था।
देखें या नहीं?
अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं, जिसमें रोमांस हो, कॉमेडी हो, परिवार की भावनाएं हों और बिना किसी भारी-भरकम संदेश के मनोरंजन मिले, तो ‘दुल्हनिया ले आएगी’ आपके लिए अच्छी चॉइस हो सकती है। फिल्म की कहानी भले ही नई न हो, लेकिन खुशाली कुमार अपने शानदार अभिनय से इसे खास बना देती हैं। उनके साथ महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा, ओमकार कपूर और स्नेहिल दीक्षित मेहरा का सशक्त सहयोग फिल्म को और मजबूत बनाता है।
फाइनल वर्डिक्ट: ‘दुल्हनिया ले आएगी’ कोई गेम चेंजर फिल्म नहीं है, लेकिन यह एक ईमानदार, साफ-सुथरी और मनोरंजक फैमिली एंटरटेनर जरूर है। अगर वीकेंड पर हल्की-फुल्की फिल्म देखने का मन है, तो इसे अपनी लिस्ट में शामिल किया जा सकता है।