दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्राओं का एक विरोध मार्च इन दिनों अपने गंभीर मुद्दे के साथ-साथ मजेदार और तुकबंदी वाले नारों को लेकर चर्चा में है। महिला सुरक्षा और स्त्री अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर निकाले गए इस मार्च में छात्राओं ने पारंपरिक नारों से अलग हटकर रोजमर्रा की चीजों, खाने-पीने की चीजों और कॉलेज कैंटीन की भाषा को अपने विरोध का हिस्सा बना लिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में छात्राएं हाथों में तख्तियां लेकर अलग-अलग तुकबंदी वाले नारे लगाती नजर आती हैं। इन नारों में कहीं समोसा-कचौड़ी है तो कहीं चाय-सुट्टा, जबकि कुछ नारों में पुरुष समाज पर व्यंग्य किया गया है।
जब ‘समोसा-कचौड़ी’ बनी विरोध प्रदर्शन की तुकबंदी वाली आवाज
मार्च के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले नारों में “समोसा कचौरी गरम करो, मर्द जात शर्म करो” और “एक सुत्ता दो चाय, मर्द जात हाय हाय” जैसे नारे शामिल रहे। छात्राओं ने गंभीर मुद्दे को अपनी अलग शैली में उठाते हुए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिन्हें सुनकर सोशल मीडिया यूजर्स भी प्रतिक्रिया देने लगे। “एक जीरा दो अजवाइन, मर्द समाज दो रिज़ाइन” जैसे नारे भी इसी अंदाज में लगाए गए।
‘मेरे सर में दर्द है, इसका कारण मर्द है’ ने खींचा सबका ध्यान
छात्राओं के नारों में कई ऐसी लाइनें भी थीं, जो सीधे सोशल मीडिया मीम और शायरी वाली भाषा से मेल खाती हैं। “मेरे सर में दर्द है, इसका कारण मर्द है” जैसी पंक्ति ने लोगों का ध्यान खींचा। इसी तरह “दो कबाब एक बिरयानी, हर मर्द की अलग कहानी” और “दो कुलचे एक बिरयानी, इन मर्दों की खत्म कहानी” जैसे नारों में खाने-पीने की चीजों के साथ तुकबंदी की गई।
‘एप्पल-अंगूर’ और ‘हुडी-स्वेटर’ ने विरोध को दिया नया अंदाज
मार्च में सिर्फ देसी खाने ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की चीजों को भी नारों का हिस्सा बनाया गया। छात्राओं ने कहा, “एक एप्पल दो अंगूर, इन मर्दों से रहना दूर”। वहीं “एक हुडी एक स्वेटर, ये मर्द होते ही हैं चीटर” जैसे नारे भी लगाए गए। इसके अलावा “ठंडी चाय गरम करो, मर्द जात शर्म करो” और “एक दर्जन में बारह आम, इन मर्दों का क्या ही काम” जैसी पंक्तियां भी सुनाई दीं।
‘मुन्ना- मुन्नी’ वाली लाइन ने बताया प्रदर्शन का पूरा मूड
इस मार्च में एक और नारा चर्चा में रहा—“मुन्ना करे कुछ भी कांड, होगी लेकिन मुन्नी बदनाम।” इस लाइन के जरिए छात्राओं ने महिलाओं को लेकर समाज में मौजूद दोहरे रवैये पर व्यंग्य करने की कोशिश की। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इन नारों को अपने-अपने अंदाज में शेयर किया और कई यूजर्स ने कमेंट में इसी तुकबंदी शैली में नई पंक्तियां लिखनी शुरू कर दीं। इस तरह गंभीर मुद्दे को हल्के-फुल्के और रचनात्मक अंदाज में उठाने वाला यह मार्च ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गया।