मध्यप्रदेश के 55 में से 28 जिलों में सामान्य से 16% से 78% तक कम बारिश, धान- सोयाबीन और मक्का की फसल पर गहराया संकट
मध्यप्रदेश में मानसून की सुस्ती अब किसानों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है। लगातार कमजोर बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और खरीफ फसलों पर संकट गहराता जा रहा है। सबसे अधिक असर धान, सोयाबीन, मक्का और कपास की खेती पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के 55 में से 28 जिलों में सामान्य से 16 से 78 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे लाखों हेक्टेयर में बोवनी प्रभावित हुई है।
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर अलीराजपुर में देखने को मिला है, जहां सामान्य से 78 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके अलावा रीवा में 61 प्रतिशत, मैहर में 48 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 46 प्रतिशत और सीधी में 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। नरसिंहपुर, झाबुआ, सिंगरौली, मंडला, टीकमगढ़, छिंदवाड़ा, सागर, रायसेन, शिवपुरी, जबलपुर, कटनी और दतिया जैसे जिले भी सामान्य से 30 से 39 प्रतिशत कम वर्षा की मार झेल रहे हैं।
प्रदेश में अब तक औसतन 247 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि तक लगभग 291 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में औसतन करीब 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। इसका सीधा असर खरीफ सीजन की बुवाई पर पड़ा है।
कई जिलों में किसान बोवनी के बाद बारिश का इंतजार कर रहे हैं। रीवा में करीब 2.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई का लक्ष्य है, लेकिन अब तक केवल लगभग 65 हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। सतना में 2.31 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले लगभग 62 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है। मैहर में भी लक्ष्य की तुलना में बुवाई काफी पीछे है।
अलीराजपुर में धान, मक्का, कपास और सोयाबीन की फसलें सूखने की कगार पर हैं। पन्ना में 11 जुलाई के बाद बारिश नहीं होने से बाजरा और धान की फसल प्रभावित हो रही है। दतिया में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं, जबकि नर्मदापुरम में धान, सोयाबीन और मक्का की बुवाई भी बारिश की कमी से प्रभावित हुई है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में शहडोल, रीवा और जबलपुर संभाग के कुछ जिलों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। वहीं उमरिया और डिंडोरी में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, सीहोर, रायसेन और विदिशा सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। खेतों में बढ़ती दरारें और सूखती फसलें किसानों की चिंता बढ़ा रही हैं। अब प्रदेशभर के किसानों की निगाहें मानसून की अगली बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि यही बारिश उनकी मेहनत और पूरी खरीफ फसल को बचा सकती है।





