8 साल बाद बदला गया US कमांड का नाम
शशि थरूर ने उठाए रणनीतिक सवाल
अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसले में अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है। यह वही नाम है जो 2018 से पहले प्रचलित था। इस फैसले के बाद भारत में कई रणनीतिक विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं ने चिंता जताई है कि कहीं यह इंडो-पैसिफिक नीति और QUAD समूह के महत्व में बदलाव का संकेत तो नहीं है।
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया, “क्या यह QUAD के ताबूत में एक और कील है?” उनके इस बयान ने विदेश नीति और सुरक्षा मामलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि यह केवल नाम परिवर्तन है और इससे कमांड की जिम्मेदारियों, संरचना या क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं में कोई बदलाव नहीं होगा। विभाग के अनुसार, 1947 में स्थापित पैसिफिक कमांड की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री James Mattis ने इसका नाम इंडो-पैसिफिक कमांड इसलिए रखा था क्योंकि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा चुनौतियां तेजी से एक-दूसरे से जुड़ रही थीं। उस समय इसे भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके महत्व की अमेरिकी स्वीकार्यता माना गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि नाम बदलने से व्यावहारिक सैन्य सहयोग पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व जरूर है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के QUAD समूह को चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में ‘इंडो’ शब्द हटने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वाशिंगटन अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं में कोई नया संदेश देना चाहता है।
फिलहाल अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भारत के साथ रक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी प्रतिबद्धता पहले की तरह जारी रहेगी। लेकिन यह फैसला आने वाले समय में QUAD और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।





