राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा चालकों की मनमानी अब सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। तेज़ रफ्तार, गलत तरीके से गाड़ी चलाना और नियमों की अनदेखी ने कई परिवारों को अपनों से छीन लिया है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन बेतहाशा बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या और चालकों की लापरवाही हालात को और बिगाड़ रही है। दिल्ली पुलिस के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक ई-रिक्शा से जुड़े हादसों में 19 लोगों की मौत हो चुकी है।
राजधानी में हादसों का सिलसिला जारी
मंगलवार को पहाड़गंज इलाके में हुए हादसे ने एक बार फिर ई-रिक्शा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। यहां लापरवाह ड्राइविंग की वजह से 12वीं कक्षा के छात्र की मौत हो गई। इससे पहले भी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जनवरी में कापसहेड़ा में स्टंट करते समय 15 वर्षीय किशोर की जान गई, मार्च में अशोक विहार में एक 10 साल की बच्ची की मौत हुई, वहीं मई और अगस्त में भी मासूम बच्चों ने अपनी जान गंवाई।
आधे से ज्यादा ई-रिक्शा अवैध
दिल्ली में करीब 2,50,000 ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिनमें से लगभग 1,00,000 बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रहे हैं। ये वाहन न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि सड़क जाम का बड़ा कारण भी बन रहे हैं। बीच सड़क पर सवारी उतारना, बिना वजह गलत दिशा में चलना और पार्किंग नियमों का पालन न करना आम बात हो गई है।
पुलिस कार्रवाई और चालकों की मनमानी
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सिर्फ इस साल 31 जुलाई तक 2,69,612 ई-रिक्शा चालकों पर चालान काटे गए। बावजूद इसके हालात काबू में नहीं आ रहे। जुर्माने भरने के बाद भी चालक फिर से वही गलतियां दोहरा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि जब तक कड़े नियम और सख्त लाइसेंसिंग सिस्टम लागू नहीं किया जाएगा, तब तक सुधार की उम्मीद कम है।
समाधान की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार और पुलिस को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे। अवैध ई-रिक्शा तुरंत ज़ब्त किए जाएं और चालकों को यातायात नियमों की ट्रेनिंग दी जाए। केवल लाइसेंस प्राप्त और प्रशिक्षित ड्राइवरों को ही सड़क पर उतरने की इजाज़त मिले, तभी राजधानी की सड़कों पर लोगों की जान सुरक्षित रह सकेगी।





