बिहार के रोहतास जिले के नासरीगंज ब्लॉक के रहने वाले दीन दयाल सिंह ने पारिवारिक खेती को कमाई का मजबूत जरिया बना दिया है। इंटरमीडिएट तक पढ़े दीन दयाल करीब 15 साल से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। परिवार के आठ सदस्य मिलकर खेती का पूरा काम संभालते हैं। एक ही खेत में मौसम के हिसाब से अलग-अलग सब्जियों की रिले क्रॉपिंग अपनाकर परिवार हर साल करीब 6 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहा है। खेती के इस तरीके से पिछले कुछ वर्षों में परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
16 साल की उम्र से खेती में जुटे दीन दयाल ने परिवार को बनाया खेती की ताकत
31 वर्षीय दीन दयाल सिंह ने महज 16 साल की उम्र में खेती में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। उनके परिवार में पिता प्रेम चंद्र सिंह, माता, तीन भाई और भाइयों की तीन पत्नियां खेती से जुड़ी हैं। परिवार का हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी के अनुसार खेत में काम करता है। खास बात यह है कि खेती के लिए बाहर से मजदूर नहीं लगाए जाते। परिवार की सामूहिक मेहनत ही पूरे काम को आगे बढ़ाती है।
एक ही जमीन पर मौसम के अनुसार फसल बदलकर बढ़ाई खेती से होने वाली आमदनी
दीन दयाल की खेती की सबसे खास बात उनका रिले क्रॉपिंग का तरीका है। इसके तहत एक फसल की कटाई के बाद उसी खेत में दूसरी फसल लगा दी जाती है। करीब 1.5 हेक्टेयर जमीन पर लौकी, खीरा, करेला और तोरई जैसी सब्जियां उगाई जाती हैं। इसके बाद मौसम के अनुसार भिंडी, आलू, पालक, पत्तागोभी, फूलगोभी, मूली और धनिया जैसी फसलें ली जाती हैं। गर्मियों में बैंगन, खीरा, कद्दू और भिंडी जैसी सब्जियों की खेती भी की जाती है।
परिवार के दो भाइयों ने संभाली फसल की बिक्री, मजदूरी का खर्च भी हुआ कम
खेती से उत्पादन लेने के साथ-साथ उसकी बिक्री की जिम्मेदारी भी परिवार ने खुद संभाल ली है। दीन दयाल के दो भाई, जिनकी उम्र 30 और 26 वर्ष है, फसल की मार्केटिंग का काम देखते हैं। इससे उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने में परिवार की भागीदारी बनी रहती है। खेती में बाहरी मजदूरों पर निर्भरता नहीं होने से खर्च को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। परिवार की इसी व्यवस्थित मेहनत से हर साल लगभग 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
KVK रोहतास की तकनीकी मदद से खेती में आए बदलाव, बढ़ी आर्थिक मजबूती
दीन दयाल को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), रोहतास, बिक्रमगंज से लगातार तकनीकी सलाह और निगरानी मिलती रही है। इसी मार्गदर्शन ने उन्हें खेती के नए तरीकों को अपनाने और बेहतर उत्पादन लेने में मदद की। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने सब्जी उत्पादन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। पिछले 3-4 वर्षों में उनकी आजीविका में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे जिले के प्रगतिशील ग्रामीण युवाओं में अपनी पहचान बना चुके हैं।
पूर्वांचल क्षेत्रीय किसान मेले में सम्मान, पारिवारिक खेती के प्रयासों को मिली पहचान
दीन दयाल सिंह की खेती को जिला और विश्वविद्यालय स्तर पर कई पुरस्कार और सम्मान भी मिल चुके हैं। 20 फरवरी 2015 को पटना स्थित सेंट्रल पोटैटो रिसर्च स्टेशन में आयोजित ‘पूर्वांचल क्षेत्रीय किसान मेला-2015’ में उन्हें सम्मानित किया गया था। भारत सरकार के कृषि कैबिनेट मंत्री ने पारिवारिक खेती में योगदान के लिए उन्हें प्रमाण पत्र और शॉल प्रदान किया। इस दौरान उनकी रिले क्रॉपिंग तकनीक की सराहना की गई। उस समय 0.25 हेक्टेयर लीज पर ली गई जमीन से वे सालाना करीब 4-5 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे थे। उन्होंने खेती में KVK रोहतास के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया था।