क्रूड ऑयल में उछाल, लेकिन राहत बरकरार! पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर

petrol and diesel prices

मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में हलचल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। जुलाई के दौरान ब्रेंट क्रूड में 23 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है और इसकी कीमत 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 84 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। वैश्विक बाजार में इस तेजी ने भारत समेत तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर इसका बड़ा असर नहीं दिखा है।

25 मई के बाद नहीं हुआ बड़ा बदलाव

सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 31 जुलाई की सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी किए। 25 मई 2026 के बाद से देशभर में ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया है। अधिकांश महानगरों और प्रमुख शहरों में कीमतें पहले जैसी बनी हुई हैं, जबकि कुछ शहरों में स्थानीय वैट और अन्य करों के कारण कुछ पैसे से लेकर एक रुपये तक का मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये तथा डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक से तीन पैसे तक की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु और पटना जैसे शहरों में कुछ पैसे की कमी देखने को मिली, जबकि लखनऊ में दोनों ईंधनों की कीमतों में एक रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

संसद में सरकार का बड़ा दावा

ईंधन की कीमतों पर संसद में भी चर्चा हुई। सरकार ने दावा किया कि यदि देश में एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल की व्यवस्था लागू नहीं होती और पूरी तरह बाजार आधारित मूल्य प्रणाली अपनाई जाती, तो मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी।

सरकार के अनुसार भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता अभी भी काफी अधिक है, लेकिन एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने आयातित तेल पर निर्भरता कम करने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण रणनीति ने भी उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से बचाया है।

E20 पेट्रोल पर सरकार ने दूर की आशंकाएं

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या इससे पुराने वाहनों के इंजन पर असर पड़ता है। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक परीक्षणों, रोड ट्रायल और करोड़ों वाहनों के वास्तविक उपयोग के दौरान ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचाता है।

सरकार के अनुसार पिछले ढाई वर्षों से E19-E20 और लगभग साढ़े तीन वर्षों से E15+ ईंधन का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इस दौरान देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और लगभग 3 करोड़ पेट्रोल कारें इस ईंधन पर चल चुकी हैं, लेकिन इंजन फेल होने या असामान्य खराबी का कोई व्यापक मामला सामने नहीं आया।

माइलेज पर हल्का असर, लेकिन पर्यावरण को फायदा

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से कुछ वाहनों में 2 से 6 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। यह अंतर वाहन के मॉडल, तकनीक और उम्र पर निर्भर करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षणों में इंजन की मजबूती पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया।

सरकार का दावा है कि E20 ईंधन बेहतर एक्सीलरेशन, अधिक स्मूद ड्राइविंग अनुभव और पारंपरिक E10 पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत तक कम कार्बन उत्सर्जन में मदद करता है। ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है और आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति पर बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बड़े बदलाव की स्थिति में ईंधन बाजार की दिशा भी बदल सकती है।

Exit mobile version