Gujarat monsoon season :गुजरात के 13 ज़िलों में बारिश का रेड अलर्ट… प्रशासन ने संभाला मोर्चा…

Red alert for rain in Gujarat 13 districts on high alert administration takes charge

गांधीनगर। गुजरात में मानसून का नया दौर अब चुनौती बनता नजर आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से 31 जुलाई से 2 अगस्त के बीच राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। संभावित जलभराव, बाढ़ और तेज हवाओं से होने वाले नुकसान को देखते हुए 13 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और राहत एवं बचाव एजेंसियों को तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

31 जुलाई से 2 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी
13 जिलों में हाई अलर्ट, अधिकारियों की छुट्टियां रद्द
NDRF-SDRF की तैनाती, सेना भी स्टैंडबाय पर
24 घंटे कंट्रोल रूम और स्थानीय स्तर पर स्कूल बंद करने की तैयारी
लोगों से अपील- जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें

राज्य सरकार का कहना है कि इस बार केवल मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने तक सीमित रहने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके। प्रशासन का फोकस विशेष रूप से निचले इलाकों, नदी किनारे बसे गांवों और शहरी जलभराव वाले क्षेत्रों पर है।

गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) डॉ. जयंती रवि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, भावनगर, भरूच, आणंद, नर्मदा, तापी, डांग, छोटा उदेपुर, पंचमहल, दाहोद और महीसागर जिलों के कलेक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में मौसम विभाग के पूर्वानुमान की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित जिलों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

डॉ. जयंती रवि ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन जिलों में भारी बारिश की संभावना है, वहां सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द की जाएं। साथ ही प्रत्येक जिले में 24 घंटे संचालित होने वाले कंट्रोल रूम सक्रिय रखे जाएं और उनकी निगरानी के लिए हर समय एक क्लास-1 अधिकारी की तैनाती सुनिश्चित की जाए। इसका उद्देश्य किसी भी आपात सूचना पर तुरंत कार्रवाई करना और राहत कार्यों में देरी न होने देना है।

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को भी पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। जहां जलभराव या बाढ़ की आशंका अधिक है, वहां इन टीमों की अग्रिम तैनाती की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि राहत दल पहले से मौके पर मौजूद रहेंगे तो आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी।

यदि बारिश का स्वरूप और अधिक गंभीर होता है, तो भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की सहायता भी ली जाएगी। राज्य सरकार ने तीनों सेनाओं को स्टैंडबाय पर रखने का निर्णय लिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा सके। यह कदम दर्शाता है कि सरकार संभावित स्थिति को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है।

प्रशासन ने जिला कलेक्टरों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित करने का अधिकार भी दिया है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार भारी बारिश, जलभराव या आवागमन बाधित होने की स्थिति बनती है तो कलेक्टर तत्काल निर्णय लेकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे। इसके साथ ही अधिकारियों को जर्जर इमारतों, कमजोर ढांचों और तेज हवाओं से प्रभावित हो सकने वाले क्षेत्रों की निगरानी करने तथा आवश्यक होने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर से लगातार नमी मिलने और सक्रिय मानसूनी प्रणाली के प्रभाव के कारण गुजरात के कई हिस्सों में अगले तीन दिनों तक भारी वर्षा हो सकती है। विशेष रूप से दक्षिण और मध्य गुजरात के जिलों में अत्यधिक बारिश, शहरी जलभराव, नदी-नालों के उफान और यातायात बाधित होने की आशंका जताई गई है। ऐसे में प्रशासन लगातार जलाशयों के जलस्तर, नदियों के प्रवाह और बांधों की स्थिति पर भी नजर बनाए हुए है।

राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, घरों से बाहर निकलने से बचें। निचले इलाकों, नदी किनारों और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करें तथा प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आपात स्थिति में स्थानीय कंट्रोल रूम और प्रशासन से तुरंत संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। ऐसे में समय रहते की गई तैयारी ही जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम कर सकती है। गुजरात सरकार ने इसी रणनीति के तहत पहले से ही राहत एजेंसियों, प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बढ़ाया है।

अगले 72 घंटे गुजरात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर सभी की नजरें टिकी हैं, जबकि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। यदि अनुमान के अनुसार भारी बारिश होती है तो यह तैयारी किसी बड़े संकट को टालने में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता यही है कि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य बिना देरी के शुरू हो और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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